Sudhir Chaudhary on Congress

सुधीर चौधरी (Sudhir Chaudhary) पहले जी न्यूज पर डीएनए करते हुए पाए जाते थे. अब उन्होंने चैनल बदल लिया है, लेकिन काम करने का तरीका उनका वही है. जब भी मौका मिलता है वह अपने नए चैनल पर भी सत्ता पक्ष का गुणगान करते हुए नजर आ जाते हैं और जब भी मौका मिलता है कांग्रेस को गलत तरीके से जनता के सामने पेश करने का मौका नहीं चूकते. इस बार भी उन्होंने ऐसा ही किया है.

इस बार अपने नए चैनल पर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के द्वारा चलाई जा रही “हर घर तिरंगा” मुहिम का गुणगान किया और यह करते हुए उन्होंने दो विचारधाराओं की तुलना तक कर दी. लेकिन इस तुलना में उन्होंने बहुत कुछ छोड़ दिया, जिस पर हम इसमें आगे बात करेंगे. लेकिन सुधीर चौधरी ने कहा क्या है, वह जानना पहले जरूरी है. सुधीर चौधरी ने अपने कार्यक्रम के माध्यम से पूछा, तिरंगा जरूरी है या उसे हाथ में लेने वाला व्यक्ति?

सुधीर चौधरी ने अपने कार्यक्रम में पूछा कि देश का राष्ट्रीय ध्वज कौन सा है, तिरंगा जिसे आप हर जगह देखते हैं या फिर नेहरू वाला तिरंगा? हालांकि सुधीर चौधरी ने अपने कार्यक्रम में यह नहीं बताया कि नेहरू वाला तिरंगा क्या देश के राष्ट्रीय ध्वज से अलग है? उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम पर मौजूदा सत्ताधारी पार्टी ने जो नफरत फैला रखी है उसका लाभ लेने की कोशिश की. सुधीर चौधरी को बताना चाहिए आखिर नेहरू वाला तिरंगा अलग कैसे हैं?

सुधीर चौधरी ने पूछा कि तिरंगा राष्ट्र का है या फिर एक खानदान का है? दरअसल राहुल गांधी, प्रियंका गांधी तथा पूरी कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जो प्रोफाइल पिक्चर लगाई है उसमें देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू दिखाई दे रहे हैं और उनके हाथ में देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा दिखाई दे रहा है. इसी पर सुधीर चौधरी ने अपने नए शो में पूरा कार्यक्रम कर दिया.

सुधीर चौधरी ने अपने पूरे कार्यक्रम में तथ्य हीन सवाल पूछे. उन्होंने पूछा कि इन दोनों में से हमारा तिरंगा कौन सा है, जो तिरंगा प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में लगाया है वह है या फिर राहुल गांधी ने जो लगाया है वह है? सुधीर चौधरी को बताना चाहिए कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने हाथों में जो तिरंगा थामा हुआ है क्या वह हमारा राष्ट्रीय ध्वज नहीं है? सुधीर चौधरी यह आरोप लगाना चाहते हैं?

दरअसल हर घर तिरंगा अभियान के तहत प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि सभी लोग अपनी प्रोफाइल पिक्चर में तिरंगा लगाएं और कांग्रेस के तमाम नेताओं ने तिरंगा लगाया, जिसमें देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी दिखाई दे रहे हैं और यही बात बीजेपी को नागवार गुजरी है और यही बात बीजेपी समर्थक मीडिया को भी नागवार गुजरी है. इसीलिए सुधीर चौधरी ने इस पर एक लंबा चौड़ा शो तक कर दिया, ताकि जनता के समक्ष कांग्रेस को तिरंगा विरोधी बताया जा सके. क्या सुधीर चौधरी जनता से यह कहना चाहते हैं कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने जो अपने हाथों में थामा हुआ है, वह हमारा राष्ट्रीय ध्वज नहीं है?

Sudhir Chaudhary द्वारा जनता को बरगलाने की कोशिश?

किसी विपक्षी पार्टी का कोई छोटा सा नेता भी अगर तिरंगे को लेकर कोई बयान दे रहा है तो उसको उस पार्टी का आधिकारिक बयान बताने की कोशिश मीडिया द्वारा हो रही है. लेकिन सुधीर चौधरी जैसे तमाम एंकर और पत्रकार, जो मौजूदा सत्ताधारी पार्टी और उसकी विचारधारा के समर्थक भी हैं, एक बार भी सवाल पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं कि, प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान के बाद भी उस संगठन के बड़े-बड़े पदाधिकारी और उससे जुड़े हुए लोग तिरंगे को अपनी प्रोफाइल फोटो क्यों नहीं लगा रहे हैं, जिससे बीजेपी निकल कर आई है? हां हम बात कर रहे हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस की.

राहुल गांधी प्रियंका गांधी तथा तमाम कांग्रेसियों ने पंडित जवाहरलाल नेहरु की प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल किया जिसमें वह तिरंगा थामे हुए हैं और इस पर सुधीर चौधरी जैसे एंकर ने एक लंबा चौड़ा शो तक कर दिया. क्या गलत किया है कांग्रेस ने? सुधीर चौधरी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके बड़े नेताओं के विचार तिरंगे को लेकर क्या रहे हैं और तिरंगे का किस हद तक जाकर उन्होंने विरोध किया है, इस पर शो करने की हिम्मत क्यों नहीं दिखाई? किसने रोका हुआ था? क्या सुधीर चौधरी कांग्रेस को राष्ट्रीय ध्वज विरोधी और जिसने आजादी के बाद से लगभग 5 दशक तक तिरंगे का विरोध किया, और अभी भी खुलकर समर्थन नहीं करते, उसे तिरंगा प्रेमी बताने की कोशिश कर रहे हैं?

सुधीर चौधरी के इस कार्यक्रम को लेकर बुद्धिजीवियों ने, कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर जमकर विरोध किया. कांग्रेस की प्रवक्ता अलका लांबा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, चैनल बदलने से सोच नहीं बदलती, जिस सोच को संघी दीमक चाट गया हो उसके बारे में अब क्या कहना. संघी, भाजपाई, गोदी मीडिया, गोदी एंकरों को स्वतंत्रता सेनानियों से आख़िर इतनी नफ़रत क्यों है?

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, राजनीतिक समझ का इससे दयनीय इज़हार मैंने पहले कभी नहीं देखा. गांधी, नेहरू, पटेल, मौलाना आदि आज़ादी के परवाने थे. उनमें जिसके हाथ में तिरंगे वाली तसवीर मिल सके, मौजूँ ही होगी. तिरंगा उन्हीं के प्रताप से हमें नसीब हुआ. उनके हाथ में नहीं तो क्या गोलवलकर-सावरकर के हाथ में दिखाएँगे?

इतिहासकार अशोक कुमार पांडेय ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, वैक्सीन ज़रूरी है या उस पर लगा फ़ोटो?

कुल मिलाकर देखा जाए तो सुधीर चौधरी के इस कार्यक्रम का सोशल मीडिया पर जमकर विरोध हुआ है. क्योंकि सुधीर चौधरी ने अपने इस कार्यक्रम के जरिए कहीं ना कहीं स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान करने की कोशिश की है, देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान करने की कोशिश की है और जिन्होंने आजादी के बाद से लंबे वक्त तक है तिरंगे का अपमान किया उन पर एक शब्द नहीं बोलकर, सुधीर चौधरी ने खुद को उनका समर्थक साबित करने की कोशिश की है.

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