kisaan aandolan

मोदी सरकार द्वारा लाये गये कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली सीमा पर प्रदर्शन करने पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा है कि दूसरों के जीवन में बाधा ना डालें. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि प्रदर्शनकारी नीति को स्वीकार नहीं करते हैं तो दूसरों को नुकसान नहीं होना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक गांव बना लें लेकिन दूसरों को तकलीफ नहीं होनी चाहिए, दूसरे लोगों के लिए बाधा ना बने. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लोगों को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन दूसरों को बाधित नहीं कर सकते. वहीं इस पूरे मामले पर केंद्र की मोदी सरकार ने भी अपना रुख स्पष्ट किया है.

सरकार ने कहा है कि इस मुद्दे को हल करने का प्रयास हो रहा है और 2 सप्ताह का समय चाहिए. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को और समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई 7 मई को होगी. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट नोएडा और दिल्ली के बीच की सड़क को सुनिश्चित करने के लिए नोएडा निवासी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था.

पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा निवासी मोनिका अग्रवाल द्वारा दायर रिट याचिका पर उत्तर प्रदेश और हरियाणा राज्य को नोटिस जारी किया था. नोटिस में उसने आरोप लगाया था कि नोएडा से दिल्ली तक उसका सफर सड़क जाम के कारण सामान्य 20 मिनट के बजाय 2 घंटे का समय ले रहा है.

जस्टिस एसके कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि सार्वजनिक सड़कों को अवरूद्ध नहीं किया जाना चाहिए. न्यायमूर्ति कौल ने आगे कहा कि हम इस बात से चिंतित नहीं हैं कि आप इस मुद्दे को कैसे सुलझाते हैं, चाहे राजनीतिक रूप से, प्रशासनिक रूप से या न्यायिक रूप से. लेकिन हमने पहले भी यह कहा है कि सड़कों को अवरुद्ध नहीं किया जाना चाहिए.

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