Tandava

वेब सीरीज तांडव को लेकर मचे हंगामे के बीच डायरेक्टर अली अब्बास जफर का माफी से जुड़ा एक लेटर सामने आया है. उन्होंने लेटर ट्वीट किया है. ट्वीट किए गए लेटर के मुताबिक, तांडव के ऑफिशियल कास्ट एंड क्रू की ओर से कहा गया है कि हम किसी की भावना को आहत नहीं करना चाहते थे.

उन्होंने कहा है कि वेब सीरीज में किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करना हमारा उद्देश्य नहीं था. अगर किसी की भावना आहत हुई है तो हम उसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं. तांडव के मेकर्स की ओर से आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा गया है, हम वेब सीरीज तांडव पर आ रहे दर्शकों के रिएक्शन को गौर से मॉनिटर कर रहे हैं और आज बातचीत के दौरान सूचना व प्रसारण मंत्रालय की ओर से हमें शिकायतों और याचिकाओं के बारे में बताया गया. लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने संबंधी शिकायतों को हम लोग गंभीरता से देख रहे हैं.

इसी के साथ बयान में आगे कहा गया, वेब सीरीज ‘तांडव’ पूरी तरह से फिक्शन है और किसी भी जीवत व्यक्ति या घटना से संबंध पूरी संयोग है. कास्ट एंड क्रू ने कभी भी किसी व्यक्ति, जाति, समुदाय, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने या बेइज्जत करने की मंशा नहीं रखी. हालांकि, वेब मेकर की ओर से लोगों कि ओर से व्यक्त की जा रही चिंता का संज्ञान लिया गया है और अगर किसी की भावना को अनजाने में ठेस पहुंची है तो इसके लिए हम बिना शर्त माफी मांगते हैं.

वहीं बीजेपी नेता राम कदम ने ट्विटर पर लिखा- आखिरकार #tandavwebseries टीम ने माफी मांग ली. पर केवल माफी से हम इस बार चुप नहीं बैठेंगे. #Amazon समेत सभी को जेल के सलाखों के पीछे भेज कर रहेंगे #AmazonPrime. इसके अलावा राम कदम ने कहा कि हम लोग 19 जनवरी से पुलिस स्टेशन के बाहर भूख हड़ताल पर बैठेंगे, जब तक कि मुंबई पुलिस एफआईआर रजिस्टर नहीं कर लेती है.

बता दें कि वेब सीरीज तांडव को लेकर बीजेपी ने मोर्चा ने खोल दिया है. इसको लेकर कई राज्यों में मामले भी दर्ज किए गए हैं. आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भी अलर्ट हो गया. इस बीच वेब सीरीज के डायरेक्टर की ओर ऐसा लेटर सामने आया है. तांडव वेब सीरीज को लेकर हो रहे विवाद पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में सोमवार को बैठक हुई. सरकार पहले ही साफ कह चुकी है कि OTT प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले फिल्म या कंटेट को लेकर सेल्फ रगुलेशन कोड बनाएं. अगर OTT प्लेटफार्म अपने लिए सेल्फ रेगुलेशन कोड नहीं बनाते हैं तो फिर सरकार कोड बनाने पर विचार कर सकती है.

मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ कुछ जिम्मेदारियां भी निहित होती हैं. क्रिएटिव फ्रीडम के नाम पर कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती. मंत्रालय के सूत्रों का मानना है कि कोरोना आपदा के कारण ज्यादातर फिल्में OTT पर रिलीज हो रही हैं. अगर यही फिल्में बड़े पर्दे या टीवी पर रिलीज होती तो इन्हें CBFC और Cable TV Regulation Act के कंटेंट गाइडलाइन्स का पालन करना होता, यानी थियेटर और OTT के लिए अलग-अलग स्टैंडर्ड नहीं हो सकते.

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