rahul gandhi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमाम आलोचनाओं को दरकिनार करते हुए, देश में होती मौतों को नजरअंदाज करते हुए, लगातार बढ़ रहे कोरोना मामलों को धता बताते हुए, लगातार पश्चिम बंगाल में चुनावी रैलियों को संबोधित कर रहे थे और रैलियों में जुट रही भीड़ को देख कर खुशी का इजहार कर रहे थे.

पूरे देश में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, बेड कम पड़ चुके हैं. अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी आ गई है. जरूरी दवाइयां मार्केट में ब्लैक में मिल रही है. लेकिन प्रधानमंत्री मोदी इन बातों को तवज्जो देकर, जनता को भरोसा दिला कर, देश को संकट से उबारने की जगह चुनावी रैलियों में व्यस्त हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे दिन भीड़ इकट्ठा करके चुनावी रैलियों को संबोधित करते हैं. इकट्ठा होने वाली भीड़ को देख कर खुश होते हैं और शाम को दिल्ली पहुंचते ही 2 गज की दूरी की बात करते हैं और हाई लेवल मीटिंग करते हैं. इन दो तरह की बातों से ही प्रधानमंत्री मोदी की लगातार आलोचना हो रही थी.

चुनाव आयोग से तमाम विपक्षी पार्टियों ने मांग की थी कि पश्चिम बंगाल में बचे हुए चुनाव को एक चरण में पूरा करा लिया जाए. लेकिन चुनाव आयोग तैयार नहीं हुआ और भाजपा भी तैयार नहीं हुई. लोगों की जान आफत में है, लेकिन मौजूदा सत्ताधारी पार्टी चुनावी तैयारी और होने वाली जीत को लेकर खुश है.

इन सबके बीच राहुल गांधी ने आज देश में एक राजनीतिक मिसाल कायम की है. राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल में अपनी बची हुई सभी रैलियों को कैंसिल करने का ऐलान कर दिया है. राहुल गांधी के इस ऐलान की उम्मीद ना ही मीडिया को रही होगी और ना ही भाजपा के नेताओं को रही होगी.

राहुल ने कहा है कि कोविड संकट को देखते हुए, मैंने पश्चिम बंगाल की अपनी सभी रैलियाँ रद्द करने का निर्णय लिया है. राजनैतिक दलों को सोचना चाहिए कि ऐसे समय में इन रैलियों से जनता व देश को कितना ख़तरा है. जो काम प्रधानमंत्री पद पर बैठे हुए व्यक्ति को करना चाहिए था, वह काम राहुल गांधी ने करके दिखा दिया है. राहुल ने आज एक एग्जांपल सेट कर दिया है नेताओं के सामने.

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