modi ji

कोरोना लगातार अपनी पैठ मजबूत करता जा रहा है. लोगों की जान जा रही है, कहीं ऑक्सीजन की किल्लत के कारण, तो कहीं बदहाल है व्यवस्था के कारण. परेशान होने वालों में अमीर भी हैं, मध्यमवर्ग भी है और गरीब भी है. इस महामारी ने हिंदू-मुसलमान, अमीर-गरीब का भेद मिटा कर रख दिया है. शमशान में सभी की चिंताएं जल रही है.

मोदी सरकार लगातार जनता के निशाने पर है. जनता सोशल मीडिया से लेकर अस्पतालों तक चीख रही है चिल्ला रही है, तड़प रही है. मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा भी फटकार लगाई जा चुकी है. ऑक्सीजन की किल्लत कोई अनजाने में नहीं हुई है. विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार ने पिछले कुछ महीने में दूसरे देशों को भेज दी थी.

देश के तमाम बड़े अस्पताल ऑक्सीजन की कमी का रोना रो रहे हैं. ऑक्सीजन की कमी के कारण भी कई मरीज अपनी जान गवा चुके हैं और गोदी मीडिया से लेकर भाजपा के तमाम नेता कोरोना के खिलाफ जंग जीतने की बात कर रहे हैं. लेकिन इतने लोगों की जान जाने के बाद महामारी अगर अपने आप खत्म हो जाती है और मोदी सरकार उसे अपनी जीत बताती है, तो यह जीत किस काम की?

बहरहाल राहुल गांधी के साथ-साथ पूरी कांग्रेस लंबे समय से मांग कर रही है कि गरीबों के खाते में पैसा डाला जाए. क्योंकि इस महामारी के कारण गरीब सबसे ज्यादा परेशान हुआ है. सबसे ज्यादा मार गरीबों पर पड़ी है. युवा बेरोजगार हुए हैं. छोटे-मोटे बिजनेस बंद हो चुके हैं. लेकिन मोदी सरकार गरीबों के खाते में पैसे डालने की जगह, उनको नगद पैसा देने की जगह, फिर से पहले की तरह आंकड़ों से खेलकर मीडिया द्वारा अपना प्रचार करवा कर देश को मूर्ख बनाना चाहती है.

मोदी सरकार ने ऐलान किया है कि, कोरोना के बीच गरीबों को 2 महीने का राशन मुफ्त में दिया जाएगा और मोदी सरकार के इस ऐलान पर गोदी मीडिया मोदी सरकार की खूब तारीफ कर रही है. गोदी मीडिया में मोदी मोदी शुरू हो चुका है. मोदी सरकार ने ऐलान किया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत अगले 2 महीने के लिए प्रति व्यक्ति 5 किलो मुफ्त अनाज दिया जाएगा. मोदी सरकार से कई सवाल है.

देश में ऑक्सीजन की किल्लत है. लोग ऑक्सीजन की कमी के कारण अपनी जान गवा रहे हैं. लोग ऑक्सीजन की व्यवस्था ना कर पाने के कारण अपनों को खो रहे हैं. गरीबों के काम धंधे बंद है. 1 महीने में 5 किलो अनाज दिया जाएगा और यह 2 महीने तक दिया जाएगा और एक गरीब परिवार में अगर चार व्यक्ति भी माना जाए तो, यह सहायता गरीबों का उपहास बनाने के लिए की जा रही है? आखिर मोदी सरकार ने देश की जनता को समझ क्या रखा है?

देश का पैसा सिर्फ अमीरों का टैक्स माफ करने के लिए और भाजपा की चुनावी रैलियों के लिए है? भाजपा सरकार का प्रचार करने के लिए है? देश का पैसा गरीबों को नगद नहीं दिया जा सकता? मोदी सरकार अगर गरीबों के लिए काम कर रही है तो नगद पैसा देने में दिक्कत क्या है? 20 लाख करोड़ का पैकेज देने का ऐलान किया गया था, पहली लहर के समय, उससे देश की जनता के हाथ में कितना पैसा आया, मोदी सरकार के पास कोई आंकड़ा है या सिर्फ ऐलान होते रहेंगे और मीडिया द्वारा प्रचार?

कोई भी बड़ा ऐलान कर दो, पूरा होगा या नहीं वह बाद में देखा जाएगा, पहले मीडिया द्वारा प्रचार करवा दो, मीडिया मोदी मोदी कर दे, काम बस इतना ही बचा है इस सरकार का? पिछले 1 साल में झूठा प्रचार मीडिया मैनेजमेंट छोड़कर अगर व्यवस्था पर ध्यान दिया गया होता, महामारी के खिलाफ लड़ाई पर ध्यान दिया गया होता तो आज ना जाने कितनी जानें बचाई जा सकती थी. उन मौतों का जिम्मेदार आखिर कौन है?

जिनके घर में 5 लोग हैं और वह गरीब हैं, उनको प्रतिमाह 5 किलो अनाज अगर मोदी सरकार दे देगी तो क्या उससे जो लोग सरकार की नाकामी के कारण मारे गए, वह वापस आ जाएंगे? उनके घर वालों को सुकून मिल जाएगा? आंकड़ों के जाल में झूठे प्रचार में आखिर कब तक उलझा कर रखना चाहती है मोदी सरकार देश को? क्या कायदे से देश के सामने आकर अपनी नाकामी के लिए पूरी सरकार को एक साथ देश से माफी नहीं माननी चाहिए? जिन्होंने अपनों को खो दिया सरकार की नाकामी के कारण, उनसे माफी नहीं मांगनी चाहिए?

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