Hijab controversy News

कर्नाटक से फैला हिजाब विवाद (Hijab controversy) अब राजनीतिक रूप ले चुका है. कर्नाटक सरकार के द्वारा स्कूल यूनिफॉर्म वाले आदेश पर पुनर्विचार के संकेत और मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री द्वारा दिए यूनिफॉर्म ड्रेस कोड वाले बयान से बीजेपी की दूरी के बीच बीजेपी नेतृत्व में हिजाब विवाद की वजह से अलग-अलग जगहों पर चल रहे आंदोलनों को लेकर बेचैनी बढ़ गई है.

कुछ मीडिया पोर्टल्स के अनुसार जो जानकारी निकल कर आ रही है उसके मुताबिक एक भावना है कि कर्नाटक सरकार और राज्य की भाजपा इकाई ने उडुपी में कुछ कॉलेजों में छात्रों के एक छोटे समूह को विरोध प्रदर्शन की अनुमति दी, ताकि यह फैले, उच्च न्यायालय तक पहुंचे और राष्ट्रीय चर्चाओं में शामिल हो.

सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व के एक हिस्से में बेचैनी उन तस्वीरों के आने के बाद और गहरी हो गई है, जिसमें पुरुषों के विरोध के बावजूद क्लास जाती छात्राएं, स्कूली छात्राओं और यहां तक कि शिक्षकों को भी अपने सिर के स्कार्फ को हटाने के लिए मजबूर किया जाना और कुछ को स्कूल गेट से ही घर जाने के लिए कहा जाना शामिल है.

कुछ मीडिया पोर्टल्स के अनुसार इस विवाद पर एक केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि, यह ऐसे समय में हो रहा है जब हम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चला रहे हैं. जब प्रधानमंत्री ने मुस्लिम महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए तीन तलाक जैसे नियमों पर प्रतिबंध लगाए हैं. दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखने से इंकार कर दिया.

लोकसभा के अंदर जब विपक्ष ने इस मामले को उठाया तो कोलार के सांसद एस मुनिस्वामी को छोड़कर बीजेपी के ज्यादा सांसद चुप रहे. यहां तक कि तेजस्वी सूर्य जो भड़काऊ भाषण देने में माहिर हैं वह भी चुप रहे. त्रिपुरा के शिक्षा मंत्री ने इस विवाद पर चिंता व्यक्त की है. वहीं एनडीए शासित बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार में हिजाब कोई मुद्दा नहीं है और यहां सभी धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाता है.

इस पूरे मामले पर हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा है कि अभी तक स्कूलों में यूनिफार्म ड्रेस कोड पर कुछ भी विचार नहीं किया जा रहा है. एक अन्य भाजपा नेता की तरफ से कहा गया है कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर चिंतित है कि कहीं यह CAA विरोधी प्रदर्शनों जैसे आंदोलन में ना बदल जाए, जिसमें मुस्लिम महिलाएं ही सबसे आगे थी.

भाजपा नेता की तरफ से कहा गया है कि CAA पर अपने उत्साह और प्रचार के बावजूद सरकार ने अभी तक दिसंबर 2019 में पारित इस कानून के लिए नियम नहीं बनाए हैं. सूत्रों का कहना है कि CAA के उलट हिजाब सीधे धार्मिक भावना और परिवार से जुड़ा हुआ माना जाता है. एक नेता की तरफ से कहा गया है कि जब पहले से कहीं ज्यादा मुस्लिम लड़कियां स्कूल और कॉलेजों में जा रही हैं तो इस तरह का एक कोड उस पर असर डाल सकता है.

सूत्रों के अनुसार बीजेपी इस बात पर विचार कर रही है कि कर्नाटक मुद्दे को कैसे हल किया जाए. ऐसे सुझाव दिए गए हैं कि राज्य यह रूख अपनाए कि लड़कियां अपने सिर को ढकने के लिए दुपट्टे का उपयोग कर सकती हैं, जो ड्रेस का हिस्सा है. ऐसा लगता है कि शीर्ष नेतृत्व इस मसले पर ज्यादा कठोर होने की बजाएं बीच का रास्ता खोजना चाहता है.

सूत्रों के अनुसार दिल्ली के शीर्ष बीजेपी नेताओं का मानना है कि, हिजाब विवाद काफी छोटा था जिसे आसानी से सुलझाया जा सकता था. हालांकि कर्नाटक के मुख्यमंत्री के करीबी लोगों का कहना है कि उन्हें दोष देना अनुचित है और इसकी जिम्मेदारी पार्टी की राज्य इकाई की है.

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