Sharad Patel

एक 30 साल के युवक को जुनून है कि वह भीख मांगने वाले लोगों का जीवन स्तर सुधारे, ताकि वह अपने पैरों पर खड़े होकर आत्मनिर्भर बन सकें. इस युवक के इसी जज्बे ने सैंकड़ों भिखारियों को सडक़ से उठाकर खुद का व्यापार करने लायक बनाया है. आज वही भिखारी इस युवक को दुआएं देते हैं.

हालांकि ऐसा नहीं है कि अपने इस साहसिक कार्य को करने में उन्हें परेशानी नहीं होती, बल्कि इसके लिए भी उन्हें हर रोज चुनौतियों से जूझना पड़ता है. बावजूद इसके वह इस काम को अपने जीवन का असली उद्देश्य बना चुके हैं. यहां बात कर रहे हैं 30 साल के शरद पटेल की. जोकि यूपी के हरदोई जिले के अंतर्गत आने वाले मिर्जापुर गांव के रहने वाले हैं.

शरद को जुनून है कि वह भिखारियों का जीवन स्तर सुधार कर उन्हें समाज का हिस्सा बनाएं, ताकि वह भी सम्मान जनक जीवन जी सकें. शरद अपने इस अभियान के साथ 15 सितंबर 2014 को लखनऊ आए गए थे. लखनऊ आकर शरद ने गैर सरकारी संस्था बदलाव की शुरूआत की. यह संस्था आज बड़ा रूप धारण कर लखनऊ में भिखारियों के बदलाव का अभियान चलाए हुए है.

250 भिखारियों को दिलवाई मुक्ति

शरद पटेल ने अपनी इस संस्था के बैनर तले करीब 250 लोगों को भिखारी जीवन से मुक्ति दिलवाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा है. कोरोना काल में भी बदलाव संस्था ने 30 लोगों को छोटे मोटे बिजनेस करवाकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. किस्मत के मारे लोग जब शरद पटेल के संपर्क में आते हैं तो वह उनका जीवन बदलने की दिशा में ठोस कदम उठाते हैं.

यही वजह है कि आज उन्हें भिखारियों के मसीहा के तौर पर जाना जाता है. शरद अपनी इस संस्था को चलाने के लिए समाजसेवी और कुछ संस्थाओं की मदद लेते हैं. हालांकि पहले पहल उन्होंने सरकारी मदद भी ली, मगर जब इसमें वह परेशानी महसूस करने लगे, तब वह सामाजिक संस्थाओं के साथ जुड़ गए. इसके परिणाम काफी अच्छे रहे और वह बदलाव संस्था को गति प्रदान कर पाए. शरद बताते हैं कि वह बच्चों को पढ़ाने के लिए निशुल्क स्कूल भी चला रहे हैं. हालांकि वह बताते हैं कि परिवर्तन की दिशा में काम करना आसान नहीं था.

लोगों को भीख मांगने के काम से हटाकर उन्हें रोजगार से जोडऩा उनके लिए चुनौती था. जो व्यक्ति एक बार भीख मांगने लगे तो उसे फिर इस काम से हटाकर अपना रोजगार शुरू करने के लिए प्रेरित करना बहुत मुश्किल होता है. वह बताते हैं कि हर रोज भिखारियों के बीच जाकर उन्हें रोजगार के लिए प्रेरित करना कठिन है. वह इन लोगों के बीच विश्वास का रिश्ता कायम करते हैं. उन्हें बेहतर जीवन का भरोसा दिलाते हैं, उन्हें अपने विश्वास में लेना पड़ता है. तब वह समझ पाते हैं कि इसमें उनकी ही भलाई है.

इस तरह से भिखारियों का बदलते हैं जीवन

शरद बताते हैं कि एक बार में वह 20 से 25 भिखारियों को ही शेल्टर होम में लेकर आते हैं. जहां 6 महीने की कड़ी मेहनत के बाद उनकी जीवनशैली में बदलाव लाना पड़ता है. उनके व्यवहार को बदलने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है. इसके बाद उन्हें छोटे छोटे बिजनेस से जोडक़र उन्हें काम करने के लिए पे्ररित किया जाता है. इसके बाद ही वह लोग खुद आत्मनिर्भर होकर अपने काम से जुड़ पाते हैं. इसमें उन्हें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसके बावजूद शरद पटेल अपने इस मानवीय कार्य को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे.

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