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कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने मौजूदा वक्त में देश के अंदर जो तनाव तथा राजनीतिक और सामाजिक हालात में अस्थिरता बनी हुई है, उसको लेकर एक अखबार में लेख लिखा है तथा प्रधानमंत्री मोदी पर सख्त टिप्पणी की है. सोनिया गांधी ने कहा है कि क्या भारत को स्थाई तौर पर ध्रुवीकरण की स्थिति में होना चाहिए?

सोनिया गांधी का लेख

सोनिया गांधी ने लिखा है कि सत्ता प्रतिष्ठान स्पष्ट रूप से चाहता है कि भारत के नागरिक यह विश्वास करें कि ऐसा वातावरण उनके सर्वश्रेष्ठ हित में है. चाहे वह पहनावा हो, भोजन हो, आस्था हो, त्योहार हो या फिर भाषा, भारतीयों को भारतीयों के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश की जाती है और कलह पैदा करने वाली ताकतों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से हर प्रोत्साहन दिया जाता है.

सोनिया गांधी ने लिखा है कि प्राचीन और समकालीन इतिहास की लगातार व्याख्या इसलिए हो रही है ताकि पूर्वाग्रह, शत्रुता और प्रतिशोध को बढ़ावा दिया जा सके. यह एक त्रासदी है कि अपने संसाधनों का इस्तेमाल देश के लिए उज्जवल और नया भविष्य गढ़ने और युवा मन को सकारात्मक कामों में लगाने के लिए हमारे संसाधनों का उपयोग करने के बजाय एक काल्पनिक अतीत के संदर्भ में वर्तमान को नया रूप देने के प्रयासों में समय और मूल्यवान संपत्ति का उपयोग किया जा रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा आरोप

सोनिया गांधी ने लिखा है कि भारत की विविधताओं को स्वीकार करने के बारे में प्रधानमंत्री जी की ओर से बहुत चर्चा हो रही है, लेकिन कड़वी हकीकत यह है कि उन्हीं के शासनकाल में जिस अपार विविधता ने सदियों से हमारे समाज को परिभाषित और समृद्ध किया है, उसका इस्तेमाल हमें बांटने के लिए किया जा रहा है .

अब यह स्थापित सत्य हो चुका है कि हमें आर्थिक विकास की गति को जारी रखना होगा, ताकि धन पैदा किया जा सके. फिर इस धन को फिर से बांटा जा सके. लोगों का जीवन स्तर सुधारा जा सके और सबसे बड़ी बात कि राजस्व अर्जन किया जा सके, जिसकी जरूरत सामाजिक कल्याण के कार्यक्रमों के लिए है.

बोगस राष्ट्रवाद

सोनिया गांधी ने लिखा है कि नफरत, कट्टरता और असहिष्णुता और असत्य का एक कयामत आज हमारे देश में व्याप्त है. यदि हम इसे नहीं रोकते हैं तो यह हमारे समाज को ऐसे तहस-नहस करेगा जिसकी मरम्मत करनी मुश्किल होगी. हम इसे जारी रखने की अनुमति नहीं दे सकते और न ही देना चाहते हैं. हम एक व्यक्ति के रूप में खड़े होकर बोगस राष्ट्रवाद की वेदी पर शांति और बहुलतावाद की बलि नहीं देख सकते. आइए नफरत के इस प्रचंडा रूप को रोकें. नफरत की यह सुनामी जो पिछली पीढ़ियों द्वारा इतनी मेहनत से तैयार माहौल को ढहाने के लिए तैयार दिखती है, इसे रोके.

नफरत का बढ़ता हुआ शोर और अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराध

उत्तेजना को बिना छुपाया भड़काना और यहां तक कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराध… हमारे समाज की मिलनसार, समावेशी परंपराओं से बहुत दूर के लक्षण हैं. त्योहारों का साझा उत्सव, अलग-अलग धर्मों के समुदायों के बीच अच्छे पड़ोसी संबंध, कला सिनेमा और रोजमर्रा की जिंदगी में आस्था और विश्वास का व्यापक मेल मिलाप, जिसके हजारों भी उदाहरण है- यह सालों से हमारे समाज की एक गौरवपूर्ण और टिकाऊ विशेषता रही है. संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए इसे कमजोर करना भारतीय समाज और राष्ट्रीयता की समग्र और संबंधित नीव को कमजोर करना है.

प्रधानमंत्री को कौन रोक रहा है?

हम विश्व स्तर पर कितना विशिष्ट देखना चाहते हैं, यह महत्वपूर्ण रूप से इस बात पर निर्भर करेगा कि हम घर पर कितने समावेशी बनते हैं, ऐसा सिर्फ नारों के माध्यम से नहीं बल्कि वास्तविक कार्यों के माध्यम से होगा. आखिर हेट स्पीच बोलने वालों के खिलाफ, चाहे वह किसी भी दिशा से आए, सार्वजनिक और स्पष्ट रूप से एक्शन लेने से प्रधानमंत्री को कौन रोकता है? आदतन अपराधी आजाद घूमते हैं.

इनके द्वारा भड़काऊ भाषण दिए जाने पर कोई रोक नहीं है. वास्तव में ऐसा लगता है कि ऐसे लोग किसी किस्म की आधिकारिक शह का आनंद लेते हैं और इसलिए भड़काऊ और मुकदमा चलने वाले बयानों से बच कर निकल जाते हैं.

जोरदार बहस, चर्चाएं और यहां तक कि ऐसी कोई भी बातचीत जहां विपरीत विचारधारा का स्वागत किया जाता है, ऐसी चीजें हम भूतकाल की बात हो गई हैं और इससे हम सब गरीब ही हुए हैं. यहां तक कि शिक्षा जगत, जिसे कभी नई विचार प्रतिक्रियाओं को प्रोत्साहित करने के लिए सम्मानित किया जाता था, अब ऐसे लोग दुनिया के अन्य हिस्सों के समकक्ष के साथ संवाद स्थापित करने के लिए शक के दायरे में हैं.

भारत को स्थाई उन्माद की स्थिति में रखने के पीछे इस नई, व्यापक विभाजनकारी योजना में कुछ और भी घातक हैं. सभी संपत्तियों और विचारों को, जो कि सत्ता के खिलाफ हैं, उसे निर्ममतासे से कुचलने की कोशिश की जाती है. राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया जाता है और राज्य मशीनरी की पूरी शक्ति उनके विरुद्ध झोंक दी जाती है. सोशल मीडिया का विशेष रूप से ऐसे तथ्यों का प्रचार करने के लिए उपयोग किया जाता है, जिसे केवल झूठ और जहरीला ही बताया जा सकता है.

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