Uttar Pradesh Assembly Elections 2022 SP BJP Congress

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Elections) में लड़ाई अब अपने अहम मोड़ पर है और यह लड़ाई अब पूर्वांचल की ओर बढ़ चुकी है. राजनीतिक दलों के लोग एक दूसरे के खिलाफ हमले तेज कर रहे हैं. इस क्षेत्र में अयोध्या और राम मंदिर भी है, जिसके जरिए बीजेपी ने अपनी राजनीतिक पारी आगे बढ़ाई थी. अवध और पूर्वांचल में पूरी की पूरी राजनीतिक लड़ाई 12 जिलों की है.

2017 में बीजेपी ने 47 सीटें इस क्षेत्र से जीती थी, जबकि उसके सहयोगी अपना दल ने क्षेत्र में 3 सीटें जीती थी. समाजवादी पार्टी को 5 तथा बहुजन समाज पार्टी को 3 सीट मिली थी. जबकि कांग्रेस को एक और दो निर्दलीय उम्मीदवार भी जीत कर आए थे. लेकिन इस बार राजनीतिक माहौल पूरी तरीके से बदला हुआ लग रहा है. बीजेपी अपनी मजबूत सीटों पर भी सरकार विरोधी लहर का सामना कर रही है.

समाजवादी पार्टी ने 2012 में इस क्षेत्र में अच्छी जीत हासिल की थी, लेकिन 2017 में बीजेपी से हार गई थी. इस बार उसे उम्मीद है कि वह अपने गढ़ से बीजेपी की जुमलेबाजी को खत्म कर देगी. जबकि मायावती अभी किंगमेकर बनने का ख्वाब देख रही हैं. इन 12 जिलों में वोटरों पर बीजेपी का दबदबा लंबे समय से रहा है. अयोध्या में राम मंदिर, जिस पर 1990 के दशक में बीजेपी सत्ता में आई थी, की बड़ी भूमिका है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी एक रैली में अयोध्या में कहा कि, जिन लोगों ने कारसेवकों पर गोलियां चलवाई, क्या वह मंदिर बनवाते? बीजेपी इस बार मंदिर के मुद्दे को बरकरार रखना चाहती थी. लेकिन उस जोर-शोर से मंदिर मुद्दे पर हवा नहीं बना पाई. बीजेपी को इस बात का अंदेशा हो गया था कि आम जनता में अब इस मुद्दे को लेकर पहले जैसा जोश नहीं है. क्योंकि मंदिर बनाने पर किसी भी तरफ से प्रतिरोध नहीं है.

बीजेपी के वोट बैंक पर करारी चोट

अवध तथा पूर्वांचल के क्षेत्र में बीजेपी पूरी ताकत लगा रही है, ताकि पहले तीन चरणों में हुए नुकसान को कम किया जा सके. पहले चरण में समाजवादी पार्टी और आरएलडी गठबंधन ने बीजेपी के वोट बैंक को लगभग तबाह कर दिया है. 2022 में बीजेपी से जिस जाट वोटर का मुंह भंग हुआ था वह इस बार किसी और की तरफ जाता दिख रहा. इसी तरह मुस्लिम बहुल इलाके बीजेपी से दूर रहे हैं.

तीसरे चरण में यादवों के गढ़ में हालांकि बीजेपी ने 2017 में पैठ बना ली थी, 2022 में सपा के साथ यादव मतदाता की एकजुटता ने तस्वीर बदल कर रख दी है. यादव परिवार के गढ़ में 30 सीटें हैं, जिनमें से 2017 में बीजेपी ने जीत हासिल की थी. 2022 में अखिलेश यादव ने बीजेपी को चुनौती देने के लिए अपने ही मैदान पर ज्यादा फोकस किया है.

अवध के साथ-साथ पूर्वांचल का बेल्ट 2017 में बीजेपी के लिए मजबूत गढ़ बनकर उभरा. 2019 के लोकसभा नतीजों ने पार्टी आलाकमान में इसको लेकर और विश्वास पैदा किया, जब उसने समाजवादी और बीएसपी गठबंधन के एक साथ आने के बावजूद यूपी में बड़ी जीत हासिल की.

बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चिंता

पहले के तीन चरणों में बीजेपी के खिलाफ जनता के बीच जबरदस्त गुस्सा दिखाई दिया है, खासतौर पर किसानों के बीच. तो वहीं अब आने वाले चरणों में पूर्वी यूपी में सांडों का खतरा बीजेपी के लिए दूसरा बड़ा मुद्दा बन गया है. यह मुद्दा पिछले कुछ दिनों में प्रमुखता से उठा है, क्योंकि किसानों ने इस पर काफी गुस्सा जाहिर किया है. इस क्षेत्र के तमाम किसान छुट्टा जानवरों से परेशान हैं. उग्र सांडों की चपेट में आने से कई लोगों की जान भी गई है. इस मामले का जिक्र नेताओं की रैलियों तक में हो रहा है.

मौजूदा सरकार के खिलाफ लहर?राष्ट्रीय लोक दल के साथ मिलकर गठबंधन करने वाली समाजवादी पार्टी मौजूदा सरकार के खिलाफ जो लहर है, उससे काफी उम्मीदें कर रही है. 2012 में पार्टी ने वाराणसी, विंध्याचल और आजमगढ़ जैसे क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया था. 2012 में 61 सीटों में से 39 सीटों पर जीत हासिल कर ली थी. लेकिन 2017 में पार्टी केवल 5 सीटों पर सिमट गई थी.

समाजवादी पार्टी भी शुरू से ही राम मंदिर मुद्दे के राजनीतिकरण के खिलाफ सक्रिय रही है. शायद यही कारण है जो अल्पसंख्यक वोटों को अपनी ओर खींचता है. लेकिन लेकिन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बार अपनी रैलियों में चालाकी से इस मुद्दे को टाल दिया. अखिलेश यादव ने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि अवध और पूर्वांचल के क्षेत्र में पार्टी के पास कोई मजबूत सहयोगी नहीं है.

कांग्रेस

अवध और पूर्वांचल का मतदाता अगर चुनाव के वक्त धर्म से ऊपर उठकर प्रियंका गांधी द्वारा उठाए जा रहे हैं मुद्दों पर फोकस करता है तो कांग्रेस भी इस बार अवध और पूर्वांचल के क्षेत्र में बीजेपी को जबरदस्त नुकसान पहुंचा सकती है. पूर्वांचल में ब्राह्मण वोट बैंक बड़ी तादाद में है और बताया जाता है कि ब्राह्मण ठाकुर योगी आदित्यनाथ से नाराज बताए जा रहे हैं. और प्रियंका गांधी ने बीजेपी के इस वोट बैंक में अगर सेंध लगा ली तो बीजेपी के लिए आने वाले चरणों में भी बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है.

आने वाले चरणों के चुनाव से पहले प्रियंका गांधी की रैलियों और रोड शो में जो भीड़ दिखाई दी है, खासतौर पर अमेठी और रायबरेली जैसे क्षेत्रों में, अगर वह वोट में तब्दील हो गई तो बीजेपी के लिए यह बड़ा आघात साबित हो सकता है. पूर्वांचल और अवध किसी जमाने में कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था और अगर इस बार प्रियंका का जादू चल गया तो इसका सीधा नुकसान बीजेपी को बड़े पैमाने पर होगा और शायद सरकार बनाने का सपना भी चकनाचूर हो सकता है.

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