Raj Thackeray Uddhav Thackeray

महाराष्ट्र सरकार में शामिल पार्टियों के सबसे वरिष्ठ राजनेता शरद पवार (Sharad Pawar) ने राज ठाकरे (Raj Thackeray) पर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी की ओर से बोलने का आरोप लगाया है. राज ठाकरे की मुख्य मांग, सरकार मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटा दे, को ध्यान में रखते हुए अधिकांश राजनीतिक विश्लेषक शरद पवार के आकलन को सही ठहरा रहे हैं.

राज ठाकरे ने अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो उनके समर्थक मस्जिदों के बाहर लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे. महाराष्ट्र से दूर वाराणसी में बीजेपी समर्थक अब इस अल्टीमेटम पर अमल कर रहे हैं. हालांकि यही एकमात्र संकेत नहीं है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष ने शिवाजी पार्क और ठाणे में जो भाषण दिया, उन मुद्दों को उनमें उठाया जिन्हें केवल बीजेपी के प्रवक्ता ही उठाते हैं.

राज ठाकरे का मुख्य विरोध किसके खिलाफ?

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे का मुख्य विरोध महाराष्ट्र की सत्ताधारी गठबंधन के दो मुख्य स्तंभों के खिलाफ दिखाई दे रहा है. एक है शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray), जो उनके चचेरे भाई भी हैं. क्योंकि इन्हीं के कारण उन्होंने शिवसेना का साथ छोड़ दिया था. वही दूसरे हैं एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार.

राज ठाकरे ने शरद पवार पर अक्टूबर 2019 के विधानसभा चुनावों के जनादेश के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है. 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और शिवसेना ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, जहां 288 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने 105 और शिवसेना में 56 सीटें जीतकर सरकार के लिए बहुमत हासिल किया था.

चिंता का विषय क्या है?

महाराष्ट्र में देखा जाए तो चिंता का विषय है यह भी है कि जमीनी स्तर के कुछ शिवसैनिक अपनी शिकायत के बारे में कहते रहे हैं. वह शिकायत यह है कि शिवसेना के नेताओं का उन नेताओं के साथ मिलकर काम करना, जिनका पार्टी के संस्थापक बाल ठाकरे ने विरोध किया था. गांधी परिवार, शरद पवार और छगन भुजबल इसमें प्रमुख है.

1990 में छगन भुजबल ने शरद पवार के खेमे में शामिल होने के लिए शिवसेना का साथ छोड़ दिया था और वह बाल ठाकरे को गिरफ्तार करने वाले राज्य के इतिहास में सिर्फ दूसरे ग्रह मंत्री हैं. राज ठाकरे ने अपने दोनों भाषण में छगन भुजबल का उल्लेख किया है. राज ठाकरे ने अपने भाषण में यह भी याद दिलाया कि एक विदेशी के प्रधानमंत्री बनने के मुद्दे पर शरद पवार ने कांग्रेस छोड़ दी थी. लेकिन सोनिया गांधी के साथ काम करने पर वह जल्दी लौट आए थे.

राज ठाकरे बाल ठाकरे की राह पर?

जिस तरह के भाषण और बयानबाजी राज ठाकरे की तरफ से हो रही है, ठीक इसी तरह सालों तक बाल ठाकरे ने महाराष्ट्र के हिंदुओं को भड़काया था. राज ठाकरे शिवाजी का जिक्र करके हिंदुओं को मुसलमानों के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. शिवाजी महाराष्ट्र के सबसे बड़े आइकॉन माने जाते हैं.

एक ऐसा व्यक्ति जिसने अपने पहले चुनाव में 13 विधानसभा सीटें जीत ली थी या एक ऐसा वक्ता जिसमें 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी विरोधी अभियान चलाया था, उसके लिए इस नई छवि के साथ सामंजस्य बिठाना थोड़ा मुश्किल था. उनकी मशहूर मिमिक्री और पैनी बुद्धि बमुश्किल दिखाई दे रही है.

तमाम बातों पर गौर किया जाए तो सवाल उठता है कि क्या बाल ठाकरे वाले इस अंदाज से राज ठाकरे शिव सैनिकों को उस तरह आकर्षित कर पाएंगे जैसा कभी बीजेपी नहीं कर पाई? मीडिया ने जिस तरीके से लाउडस्पीकर की मांग को हाइलाइट किया और फिर बीजेपी समर्थित टीवी चैनलों ने इसे मुद्दा बना दिया, उसके परिणाम स्वरूप महाराष्ट्र के मुसलमान जो अब तक बीजेपी शासित राज्यों में अपने समुदाय पर किए जा रहे हैं अपमान से बचे हुए थे, उनके लिए मस्जिदों में लाउडस्पीकर एक चिंता का विषय बन गया है.

अब महाराष्ट्र की सरकार का नेतृत्व शिवसेना प्रमुख और उनके कट्टर विरोधी उद्धव ठाकरे के हाथों में है. ऐसे में अपने चचेरे भाई को ज्यादा छूट देना मुख्यमंत्री के लिए आत्मघाती हो सकता है. मुस्लिम नेताओं ने अपनी ओर से अपने समुदाय को यह संदेश देना शुरू कर दिया है कि लाउडस्पीकर थोड़ा धीमा करवा देना चाहिए. रमजान के महीने में सेहरी से पहले ही यानी तड़के ही मस्जिदों में लाउडस्पीकर बजने लगता है.

लाउडस्पीकर के मुद्दे पर एक ऐसे नेता द्वारा अल्टीमेटम देना जिसके पास चुनावी समर्थन की कमी है और जो स्पष्ट रूप से हिंदुत्व की राजनीति कर रहा है, उस समुदाय को गलत संदेश देता है जो पहले से ही पूरी तरह से घिरा हुआ है. समुदाय और सरकार के बीच केवल एक बारीक समझ ही दोनों पक्षों को अपनी गरिमा बनाए रखते हुए इस समस्या को सुलझाने में मदद कर सकती है.

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