Nupur Navin

पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी मामले में खाड़ी देशों की ओर से आई आपत्ति और बीजेपी ने फौरन एक्शन लिया. इस लिस्ट में अफगानिस्तान की तालिबान सरकार का भी नाम जुड़ गया है. तालिबान ने नूपुर शर्मा के मामले में भारत को कट्टरपंथियों पर लेक्चर दे दिया है. तालिबान के प्रवक्ता ने कहा है कि हम भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि इस तरह के कट्टरपंथियों को पवित्र मजहब इस्लाम का अपमान करने और मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने की इजाजत न दें.

लेकिन पार्टी से निकाले जाने के बाद “नवीन जिंदल” ने कहा है कि पार्टी जो करेगी ठीक ही करेगी. पार्टी ने मुझे निकालने का फैसला देश हित में लिया है. देश के लिए मोदी और अमित शाह ने इतना कुछ किया है. देश के लिए पार्टी को अपनों का भी बलिदान देना होता है. एक मीडिया चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा पार्टी जब मुझसे पूछेगी तो मैं इसके बारे में बताऊंगा कि कैसे मुझे इस मामले में उकसाया गया.

नवीन जिंदल ने कहा कि कुछ लोगों ने हमारे देवी देवताओं के बारे में अपशब्द लिखे हैं. राम, कृष्ण, शिवलिंग, गायत्री देवी जैसे कई भगवानों के बारे में गलत बातें बोली गई. तो मैंने इसी के जवाब में अपनी टिप्पणी लिखी थी. शुरू में मुझे ट्विटर और फेसबुक पर धमकियां मिल रही थीं, लेकिन अब मेरे बेटे बेटियां और पत्नी को भी परेशान किया जा रहा है. मेरे परिवार और घर की वीडियो बनाकर डाली जा रही है.

वही नूपुर शर्मा से मीडिया चैनल ने सवाल किया तो उन्होंने कहा मैंने अपना बयान सार्वजनिक कर दिया है. अब मुझे इस मामले पर कुछ नहीं कहना है. मैंने बिना किसी शर्त अपना बयान वापस ले लिया है. मैंने इसे लेकर पुलिस में विस्तार से जानकारी शेयर की है. मुझे इसके अलावा कुछ नहीं कहना है. नो कमेंट.

आपको बता दें कि 26 जून टीवी न्यूज़ डिबेट के दौरान पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी करने वाली 37 साल की नूपुर शर्मा बीजेपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता थी. इसके दूसरे दिन विवादित बयान वाला वीडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट होने लगा. 10 दिन तक बीजेपी की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई. लेकिन खाड़ी देशों की आपत्ति के बाद बीजेपी ने नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल पर कार्यवाही करके डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की.

आपको बता दें कि इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है. कुछ लोग बीजेपी के नेताओं के समर्थन में हैं तो कुछ लोग विरोध में हैं. कुछ लोगों का कहना है कि इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण क्या ही होगा की बहुलतावादी भारत को उन देशों से नसीहत मिल रही है जहां अल्पसंख्यकों के अधिकार दोयम दर्जे के नागरिकों से भी बदतर हैं.

कुछ लोगों का कहना है कि जिस भारत में मुस्लिम समाज सर्वोच्च पद तक जाने के लिए स्वतंत्र हो, उससे धर्मनिरपेक्षता पर टिके रहने के लिए इस्लामिक देशों की ओर से दबाव डाला जाता है. लेकिन शिवलिंग का मजाक उड़ा रहे मुस्लिम नेताओं से लेकर मौलानाओं तक पर यह इस्लामिक देश चुप्पी साधे रहते हैं. तालिबान की ओर से भारत को दी गई नसीहत को विडंबना ही कहा जाएगा. क्योंकि ऐसा देश जो पूरी तरह से इस्लामी कानूनों के हिसाब से शासन-प्रशासन चलाता हो. अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात छोड़िए अपने ही मजहब की महिलाओं पर क्रूरता दिखाता हो. वह पाठ पढ़ा रहा है.

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