Amit-Shah

पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के बाद प्रचंड बहुमत से तृणमूल कांग्रेस की वापसी हो गई है. ममता बनर्जी लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुकी है.

पश्चिम बंगाल के नतीजों के बाद जो कुछ भी बंगाल के अंदर देखने को मिला वह एक स्वस्थ लोकतंत्र में और सभ्य समाज में बिल्कुल भी उचित नहीं है. पश्चिम बंगाल में लगातार हिंसा की खबरें आती रही. तृणमूल कांग्रेस पर भारतीय जनता पार्टी आरोप लगा रही है हिंसा को बढ़ावा देने का.

वहीं तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि यह हिंसा बीजेपी की शह पर हुई है. चुनाव के बाद हुई हिंसा में कई लोग जख्मी हुए हैं, कई लोग अपनी जान गवा चुके हैं, कई जगह पर आगजनी हुई. चुनाव के बाद यह हिंसा बिल्कुल नहीं होनी चाहिए थी. तृणमूल कांग्रेस की तरफ से कहा गया कि पुलिस प्रशासन अभी भी चुनाव आयोग के अंडर में है.

पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा को लेकर बीजेपी ने पूरे देश में धरना प्रदर्शन किया और तृणमूल कांग्रेस पर लोकतंत्र की हत्या से लेकर तमाम तरह के आरोप लगाए और इसके साथ-साथ कांग्रेस और लेफ्ट पर भी आरोप लगाए. जबकि बीजेपी, तृणमूल, लेफ्ट और कांग्रेस चारों पार्टियों के कार्यकर्ता मारे गए हैं.

बीजेपी बंगाल की हिंसा को लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन और धरना प्रदर्शन कर रही है. जहां जहां उसकी सरकारें हैं वहां वहां पर भी यह विरोध दर्ज कराया गया भाजपा की तरफ से. अब सवाल यह उठता है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह क्या कर रहे हैं? गृह मंत्रालय क्या कर रहा है? केंद्र में सरकार तो भाजपा की है. अगर बंगाल सरकार की शह पर हिंसा हुई है तो कार्रवाई करें गृह मंत्रालय.

धरना प्रदर्शन करके आखिर क्या माहौल तैयार किया जा रहा है? किस को दिखाया जा रहा है? आखिर मीडिया मैनेज करके, विपक्षी पार्टियों को जनता की नजरों में बदनाम करके क्या साबित करना चाहती है भाजपा? केंद्र में सरकार खुद की है जांच करा कर कार्यवाही कर दे. किसने रोका?

पंचायत चुनाव की गिनती को लेकर और उसमें तथा कथित धांधली को लेकर गोरखपुर में भी आगजनी हुई, पुलिस की गाड़ियां जला दी गई. आखिर उस पर भाजपा पूरे उत्तर प्रदेश में खुद की सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन क्यों नहीं कर रही है? कब तक जनता को गुमराह करने की राजनीति होती रहेगी इस देश की राजनीतिक पार्टियों द्वारा? खुद की सरकार में कुछ हो तो चुप, दूसरे की सरकार में कुछ हो तो तांडव? ऐसा नहीं चलेगा.

जिस समय चुनाव प्रचार चल रहा था पश्चिम बंगाल में, उस समय योगी आदित्यनाथ से लेकर पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष तक तृणमूल के कार्यकर्ताओं को खुलेआम धमकी दे रहे थे हाथ पैर तोड़ने की, जान से मारने की. अपने ही नेताओं के बयान पर भाजपा की चुप्पी क्यों?

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