Mamata Banerjee

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की तृणमूल कांग्रेस ने विपक्षी एकता को एक और झटका दिया है. ममता बनर्जी की पार्टी ने निर्णय लिया है कि उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान से वह दूर रहेंगी. जगदीप धनखड़ के विपक्षी प्रतिद्वंदी कांग्रेस के दिग्गज नेता मार्गरेट अल्वा है. तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिजीत बनर्जी ने कहा है कि पार्टी ने सर्वसम्मति से दोनों उपराष्ट्रपति उम्मीदवारों का समर्थन नहीं करने का फैसला लिया है.

सवाल यह है कि आज ही तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने विपक्षी दलों की एकता पर जोर दिया है. उन्होंने कहा है कि 2024 का चुनाव बीजेपी के विभाजन को खारिज करने वाला होगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि 2024 में जब बीजेपी नाकाम होगी तो विपक्षी दलों को अगली सरकार बनाने के लिए साथ आना होगा. ममता बनर्जी आज से 2 साल बाद जिस विपक्षी एकता का संदेश दे रही हैं और जिसमें वह भरोसा जता रही है, क्या वह सच में संभव है? ममता बनर्जी ने अब तक की विपक्षी एकता के लिए कुछ ऐसा किया है या फिर उन्होंने उस विपक्षी एकता में खलल ही डाली है?

ममता बनर्जी खुद यूपीए से हटकर विपक्षी दलों का एक मोर्चा बनाने की कोशिशों में पिछले कुछ समय से लगी हुई है. पिछले साल दिसंबर महीने में ममता बनर्जी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के अस्तित्व को ही नकार दिया था. उन्होंने कहा था कि यह यूपीए क्या है? कोई यूपीए नहीं है. देखा जाए तो ममता बनर्जी खुद को 2024 में नरेंद्र मोदी के सामने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में तैयार करने की कोशिशों में जुटी हुई है और इसके लिए वह कांग्रेस को लगातार खारिज कर रही हैं.

इसी रणनीति का हिस्सा है कि वह एनडीए के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार का तो विरोध कर ही रही है, साथ ही विपक्ष की तरफ से खास तौर पर कांग्रेस नेता जो उप राष्ट्रपति के उम्मीदवार हैं उनका भी समर्थन न करने का ऐलान किया है. खबर तो यह भी आ रही है कि असम में जो बीजेपी के मुख्यमंत्री हैं उनके साथ और एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार धनखड़ के साथ ममता बनर्जी की पिछले दिनों लंबी मीटिंग हुई है और अब ममता बनर्जी ने विपक्ष के उम्मीदवार का समर्थन न करने का ऐलान करके कहीं ना कहीं विपक्षी एकता को कमजोर ही तो किया है.

मई के महीने में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने जगदीप धनखड़ ने न्यायपालिका को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था. लेकिन यही अभिषेक बनर्जी की पार्टी अब जगदीप धनखड़ के खुले विरोध में नहीं आ रही है. अभिषेक बनर्जी ने कहा है कि एनडीए के उम्मीदवार को समर्थन देने का सवाल ही नहीं उठता. जिस तरह से विपक्षी उम्मीदवार का फैसला बिना उचित परामर्श और विचार विमर्श किया गया हमने सर्वसम्मति से मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है, यह कहीं ना कहीं कई सवाल खड़े कर रहा है.

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