Akhilesh Yadav Mamata Banerjee

अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का समर्थन करने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) बनारस पहुंची थी. बनारस प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र है. 2024 को लेकर ममता बनर्जी इस तैयारी में हैं कि लोकसभा चुनाव 2014 मोदी बनाम ममता हो और पूरे उत्तर प्रदेश में बनारस को इसीलिए ममता बनर्जी ने चुना था.

पश्चिम बंगाल में बीजेपी को शिकस्त देने के बाद ममता बनर्जी सीधे दिल्ली पहुंची थी. उनका मकसद क्या था यह तो सभी को मालूम था, प्रधानमंत्री मोदी को अगले लोकसभा चुनाव में चैलेंज करने के लिए. हर रोज बनते और बिगड़ते समीकरणों के बीच ममता बनर्जी का बनारस पहुंचना काफी अहम है और यह उनका दूसरा यूपी दौरा था. पहले ममता बनर्जी लखनऊ में अखिलेश यादव के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बीजेपी को हराने की अपील कर चुकी थी.

बेशक अभी तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की मदद के लिए खड़ी हुई दिखाई दे रही हो, लेकिन आगे भी यही भाव बना रहेगा या समाजवादी पार्टी के साथ भी वैसा ही व्यवहार होगा जैसा कांग्रेस के साथ तृणमूल कांग्रेस कर रही है?

ममता बनर्जी के वाराणसी दौरे का स्पष्ट मकसद सीधे-सीधे प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करना और संघ बीजेपी को निशाने पर लेना है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आगे भी यह सब एक दायरे में ही सीमित रहने वाला है? बीजेपी से टकराव तो ममता के लिए अभी ठीक वैसा ही है, जैसा 2011 से पहले बंगाल में वाम मोर्चे के साथ रहा.

लेकिन अखिलेश यादव के सामने यह महत्वपूर्ण सवाल जरूर होना चाहिए कि ममता बनर्जी मदद के बदले क्या देने वाली है? बंगाल में तो ममता बनर्जी का ट्रैक रिकार्ड इस मामले में काफी खराब है. पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल करने के लिए ममता बनर्जी ने कांग्रेस का भरपूर सहयोग लिया और सत्ता हासिल होते ही नाता तोड़ लिया. नाता तोड़ने तक सीमित रहता तो कोई बात नहीं थी. यहां तो कांग्रेस के नेताओं को ही तोड़ने लगी थी.

महाराष्ट्र में शरद पवार के सामने भी ममता बनर्जी ने ऐसा ही कुछ प्रस्ताव दिया था. हालांकि शरद पवार इस मामले पर चुप थे. नवाब मलिक की गिरफ्तारी के बाद भी शरद पवार की तरफ से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि वह कांग्रेस को किनारे कर ममता के नेतृत्व में विपक्ष को एकजुट करने में अपनी भूमिका के पक्षधर हैं.

बंगाल से बाहर निकलकर ममता बनर्जी वैसी ही तोड़फोड़ मचाने की कोशिश कर रही हैं जैसे 2014 के बाद बीजेपी ने किया था. हाल फिलहाल सबसे ज्यादा तोड़फोड़ ममता बनर्जी ने कांग्रेस के अंदर मचाई है, गोवा से लेकर असम तक और दूसरे राज्यों में भी.

तृणमूल कांग्रेस इस वक्त बंगाल से बाहर निकलकर दूसरे राज्यों में भी अपना आधार तलाशने की कोशिश कर रही है. इसके लिए उसने कांग्रेस में कुछ राज्यों में तोड़फोड़ भी मचाई. तृणमूल कांग्रेस अपने आप को राष्ट्रीय पार्टी बनाने की कवायद में है और इसके लिए उसे दूसरे राज्यों में भी अपना आधार तैयार करना होगा. यह आधार गठबंधन से हटकर भी होगा.

मुलायम सिंह यादव से दुश्मनी को ममता बनर्जी शायद पहले ही भुला चुकी हैं और अभी तक अखिलेश यादव ही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का शिकार होने से बचे हुए हैं. लेकिन क्या आगे भी ऐसा ही इरादा है? क्या आने वाले समय में अखिलेश यादव को ममता बनर्जी से सतर्क रहने की जरूरत नहीं है?

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