Muslim countries

बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा की टिप्पणी पर भारत को अरब देशों (Muslim countries) के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है. अरब देशों की आपत्ति पर भारत सरकार को लगातार सफाई देनी पड़ रही है. इससे पहले भी दो मामलों में ऐसी स्थिति देखने को मिली थी. 2015 में सांसद तेजस्वी सूर्य ने सऊदी अरब की महिलाओं को लेकर एक ट्वीट किया था. अरब देशों ने निंदा की उसके बाद ट्वीट को हटाकर सार्वजनिक तौर पर उन्होंने माफी मांगी थी.

अप्रैल 2020 में निजामुद्दीन मरकज पर कोरोना फैलाने का आरोप लगा तो अरब देशों ने इसकी आलोचना की. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सफाई में कहा था कि कोविड-19 जाति, धर्म, रंग, भाषा या सीमाओं को नहीं देखता. अरब देशों की आपत्ति पर बीजेपी इतनी जल्दी कार्यवाही क्यों कर रही है, इसकी क्या वजह है?

भारत से बड़ी संख्या में नौकरी की तलाश में लोग गल्फ देशों की ओर जाते हैं. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गल्फ के सिर्फ 9 देशों में करीब 9000000 भारतीय मूल के लोग रहते हैं. इनमें से सबसे ज्यादा 3500000 लोग यूएई और 30 लाख लोग सऊदी अरब में रहते हैं. कतर, यूएई और सऊदी अरब में भारतीयों के कई बड़े रिटेल स्टोर और रेस्टोरेंट भी हैं. ऐसे में नूपुर शर्माा के बयान के बाद कतर और यूएई के सोशल मीडिया पर बायकाट इंडिया ट्रेंड करने लगा था. साफ है कि इससे इन देशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों और उनके बिजनेस पर इसका असर पड़ना तय था.

गल्फ देशों के बयान पर भारत के तुरंत एक्टिव होने की एक वजह विदेशी पैसा भी है. महामारी काल से पहले 2019-20 में गल्फ देशों में रहने वाले लोगों ने 6.38 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा पैसा भारत भेजा था. भारत में इस पैसेे का सबसे अधिक हिस्सा महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश और बंगाल में आता है. यही वजह है कि भारत गल्फ देशों के भावनात्मक मुद्दे को हल्के में नहीं लेना चाहता.

तेल और गैस पर भारत की निर्भरता

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने इसी साल मार्च महीने में संसद में कहा था कि भारत में प्रतिदिन कुल 5 मिलियन बैरल तेल की आवश्यकता होती है और इसका 60% गल्फ देशों से आता है. भले ही बीते कुछ सालों में गल्फ देशों पर तेल की निर्भरता कम हुई हो लेकिन अब भी भारत में खपत होने वाला तेल का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है. भारत के लिए तेल सिर्फ ट्रांसपोर्ट के लिए ही नहीं बल्कि देश की स्ट्रैटेजिक सिक्योरिटी के लिहाज से भी बेहद खास है. यही वजह है कि भारत गल्फ देशों के इमोशनल मुद्दों को लेकर बेहद संवेदनशील है.

केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई, सऊदी अरब और कतर भारत के टॉप ट्रेंडिंग पार्टनर में से एक हैं. यही नहीं अमेरिका के बाद UAE भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड डेस्टिनेशन भी है. 2020-21 में भारत और यूएई के बीच 5.66 करोड रुपए का बिजनेस हुआ था. इसके अलावा सऊदी अरब भारत का चौथा सबसे बड़ा ट्रेंडिंग पाटनर है. भारत का सऊदी अरब के साथ 3.33 लाख करोड़ रुपए का ट्रेंड है.

आजादी के बाद ही भारत और सऊदी अरब के बीच 1947 में राजनयिक संबंध स्थापित हो गए थे. जियोपोलिटिकल और व्यापार के अलावा कल्चर वजहों से भी भारत के साथ गल्फ देशों के रिश्ते मजबूत है. इसकी एक खास वजह यह है कि सऊदी अरब में ही इस्लाम धर्म के संस्थापक पैगंबर मोहम्मद का जन्म हुआ था. मक्का मदीना पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए बहुत बड़ा पवित्र तीर्थ स्थल है.

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