Shinzo Abe

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे (Shinzo Abe) अब इस दुनिया में नहीं है. शुक्रवार को नारा शहर में वह भाषण दे रहे थे तभी हमलावर ने उन्हें पीछे से गोली मार दी. उन्हें बचाने के लिए अस्पताल में डॉक्टरों की टीम 6 घंटे तक मशक्कत करती रह ,लेकिन सफल नहीं हो सकी. अंततः उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. शिंजो सबसे लंबे वक्त तक जापान के प्रधानमंत्री रहे, लेकिन उनकी शख्सियत सिर्फ इतनी भर नहीं है.

दूसरे वर्ल्ड वॉर के दौरान जापान ने अपनी सेना के लिए जबरन सेक्स स्लेव के तौर पर महिलाओं और लड़कियों को रखा, जिन्हें कंफर्ट वीमेन कहा जाता था. जापानी सेना में ऐसी कंफर्ट विमेन 80 हजार से 2 लाख के बीच थी. इनमें से ज्यादातर लड़कियां कोरिया, चीन, ताइवान और साउथईस्ट एशिया से लाई गई थी. 28 दिसंबर 2015 को साउथ कोरिया और प्रधानमंत्री शिंजो आबे की जापानी सरकार ने कंफर्ट वीमेन को लेकर एक समझौता किया था.

इस समझौते के 3 हफ्ते बाद ही शिंजो आबे ने जापानी नेशनल असेंबली से कहा था, ऐसा कोई डॉक्यूमेंट नहीं पाया गया जिसमें यह कहा गया है कि कंफर्ट वीमेन को जबरन ले जाया गया था. उनके इस बयान को जापान के कंफर्ट वीमेन के इतिहास को नकारने और इस मुद्दे पर पहले माफी मांगने और फिर मुकरने के रूप में देखा गया.

1977 में बना Nippon Kaigi जापान का कट्टर राष्ट्रवादी और राइट विंग संगठन है. जापान के प्रधानमंत्री रहे शिंजो इस संगठन के बड़े समर्थक थे. इस संगठन का प्रमुख उद्देश्य जापान के वर्तमान संविधान और खास तौर पर उसके आर्टिकल 9 को बदलना है, जिसमें जापान के स्टैंडिंग आर्मी यानी स्थाई या प्रोफेशनल सेना रखने पर रोक है. Nippon Kaigi का मानना है कि जापान को उस ताकत के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए जो ईस्ट एशिया को पश्चिमी ताकतों से आजाद करा सके. इस संगठन का मानना है कि 1946 से 1948 के दौरान जापान पर चला युद्ध अपराध का मुकदमा अवैध था.

Nippon Kaigi एक गैर सरकारी संगठन है लेकिन जापान की राजनीति और सरकार पर भी इस संगठन का प्रभाव इसके गठन के बाद से ही बढ़ता गया 2020 तक इसके जापान में 38 से 40 हजार सदस्य थे.

शिंजो आबे के नाना को शैतान क्यों मानता है चाइना?

शिंजो आबे के पिता शिनतारो आबे 1944 में दूसरे वर्ल्ड वॉर के दौरान कामाकाजी पायलट बनने के लिए एक लेवल एविएशन स्कूल में दाखिल हुए थे. लेकिन जापान के सरेंडर करने के चलते उन्हें कामाकाजी पायलट के तौर पर काम करने का मौका नहीं मिला. 1924 में जन्मे शिनतारो आबे बाद में एक अखबार के पॉलिटिकल रिपोर्टर बन गए. बाद में वह राजनेता और फिर 1982 से 1986 तक जापान के विदेश मंत्री रहे थे.

दूसरे वर्ल्ड वॉर में जापान ने लड़ाई की एक खास रणनीति तैयार की थी, जिसका नाम था कामाकाजी. दरअसल जापानी पायलट दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाते हुए जानबूझकर अपना प्लेन क्रैश कर देते थे. जापानी पायलटों के इस सुसाइड अटैक को ही कामाकाजी कहा जाता है. एक चीनी लेखक ने शिंजो के नाना के लिए लिखा है कि उनके अपराधों का ढेर स्वर्ग तक लगा है. वह सच में शैतान है. 1986 में जन्मे नोबुसुके किशी की सबसे ज्यादा चर्चा जापान के चीन पर कब्जे के दौरान चीनियों पर अत्याचार के लिए होती है.

शिंजो के नाना ने 1931 में चीन के मंचूरिया पर कब्जे में बड़ी भूमिका निभाई थी, जिसका उन्हें इनाम मिला. चीनी इतिहासकारों का कहना है कि जापानी सेना ने जबरन वेश्यावृत्ति से लेकर चीनियों को फां’सी पर लट’काने और उन पर केमिकल एक्सपेरिमेंट जैसे कई अपराध किए थे. नोबुसुके किशी ने एक ऐसा सिस्टम बनाया जिसमें जापान के डेवलपमेंट के लिए चीनी लोगों की मेहनत और चीन के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल किया गया.

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