Apple-vs-Facebook

क्या आपको पता है आपके मोबाइल में इंस्टॉल ऐप कौन सी जानकारी चुरा रहा है और कितना नुक़सान हो सकता है? मोबाइल ऐप की संदिग्ध गतिविधियों से डेटा सुरक्षा पर दुनिया भर में हाल के दिनों में गंभीर सवाल खड़े होते रहे हैं.इसी मोबाइल डेटा यानी यूज़र की जानकारी को लेकर दुनिया की दो दिग्गज कंपनियाँ फ़ेसबुक और एप्पल आमने-सामने हैं.

वही डेटा जिस पर हममें से अधिकतर लोग ध्यान भी नहीं देते. ये वे डेटा हैं जिनका इस्तेमाल आपके मोबाइल फ़ोन में इंस्टॉल किए गए अधिकतर ऐप करते हैं और आपको पता भी नहीं चलता.इन जानकारियों में आपके फ़ोन नंबर डायरेक्टरी से लेकर, तसवीरें, वीडियो, मैसेजेज और दूसरी गुप्त जानकारियाँ भी शामिल हैं. इससे भी बड़ी चीज यह है कि ये ऐप आपकी पसंद और नापसंद भी जानते हैं.

यानी यदि उनको ज़रूरत पड़ी तो वे आपकी पसंद-नापसंद की चीजों को भी प्रभावित कर सकते हैं. हाल ही में डेटा चोरी और डेटा लीक से जुड़े कई मामले सामने आए हैं. यूजर भी इसकी सुरक्षा को लेकर सतर्क हुए हैं और उनकी चिंताएँ भी बढ़ी हैं. इन ऐप पर इसलिए संदेह होता रहा है कि जब भी मोबाइल में किसी ऐप को इंस्टॉल किया जाता है तो वे ऐप कुछ डेटा तक पहुँच के लिए मंजूरी माँगते हैं, लेकिन कुछ डेटा बिना मंजूरी लिए ही वे इस्तेमाल भी करने लगते हैं.

वे ऐप भी जो मंजूरी माँगते हैं अक्सर लोग उसको बिना ज़्यादा सोचे-समझे मंजूरी दे देते हैं. इन्हीं चिंताओं को लेकर एप्पल कंपनी ने अपने ग्राहकों के लिए एक पेशकश की जो फ़ेसबुक को चुभ गई. एप्पल ने घोषणा कर दी कि वह इन एप के डेटा इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता लाने वाला है. उसने कहा कि कम से कम वह आईफ़ोन, आईपैड और मैक यूज़र के लिए ऐसा करेगा.

उसके इस फ़ैसले का मक़सद यह है कि आपको पता रहे कि कौन सा ऐप आपकी कौन सी जानकारी का इस्तेमाल कर रहा है और इस्तेमाल से पहले आपसे मंजूरी ले. फ़ेसबकु को यह घोषणा नागवार गुज़री. उसने एप्पल की यह कहकर आलोचना की कि एप्पल प्रिवेसी में बदलाव से व्यवसाय की क्षमता प्रभावित होगी. फ़ेसबुक ने तो इसके लिए अमेरिकी अख़बारों में फुल पेज का विज्ञापन भी निकाल दिया. दरअसल, फ़ेसबुक को दिक्कत यह है कि इसका ऐप भी लोगों को ट्रैक करता है.

यानी आपकी पसंद-नापसंद, आप गूगल पर क्या ढूँढते हैं और क्या शॉपिंग कर रहे हैं, इस पर नज़र रखता है. तभी आपके फ़ेसबुक पेज पर विज्ञापन भी उसी से जुड़ा आता है. अब यदि फ़ेसबुक के डेटा ट्रैक करने पर पाबंदी लग जाएगी तो इसका धंधा प्रभावित होगा. और ज़ाहिर है फ़ेसबुक तो यह कभी नहीं चाहेगा. और इसीलिए इसने कहा है कि एप्पल के फ़ैसले से व्यवसाय प्रभावित होगा.

ऐप से डेटा चोरी?

लेकिन एप्पल ने भी फ़ेसबुक के आरोपों का जवाब दिया है और कहा है कि एप्पल फ़ेसबुक जैसी कंपनियों से यह नहीं कह रहा है कि वे अपने विज्ञापन करने के तौर-तरीक़ों को बदलें, बल्कि यह कंपनियों से कह रहा है कि वे यूज़र को बताएँ कि वे क्या ट्रैक कर रहे हैं और उनसे इसके लिए मंजूरी लें. ज़्यादातर ऐप यूज़र के बारे में जानकारी इकट्ठा करते हैं और कई बार उस ऐप के काम करने के लिए ऐसा ज़रूरी होता है.

मिसाल के तौर पर किसी नेविगेशन ऐप को काम करने के लिए यूज़र की लोकेशन या जीपीएस तक पहुँच की ज़रूरत होगी. इसी तरह कई ऐसे ऐप भी हैं, जो बेहतर सर्विस के अलावा अपने लिए भी आँकड़े जुटाते हैं. कई बार ऐसा करने का मक़सद यूज़र की ओर से ऐप को इस्तेमाल करने का तरीक़ा समझना भी होता है. कुछ ऐप यूजर्स का ग़लत फायदा उठाकर ऐप की मदद से कई ऐसी जानकारियाँ निकाल लेते हैं जिससे वे किसी को बेचकर कमाई कर सकें.

हालाँकि, कुछ कंपनियों ने ऐसे डेटा चोरी को रोकने का दावा करने वाली कुछ सेवाएँ शुरू की हैं. दावा किया जाता रहा है कि ऐप के एनक्रिप्टेड होने की स्थिति में भी यह सर्विस पता लगा सकती है कि ऐप ने यूज़र का कौन सा डेटा इस्तेमाल किया है. लेकिन यह कितना भरोसेमंद है, इस पर कुछ पक्का दावा नहीं किया जा सकता.

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