Bihar

भारत में कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी देखने को नहीं मिल रही है हर दिन 3 से 4 लाख के बीच कोरोना पीड़ितों के आंकड़े सामने आ रहे हैं. बताया जाता है कि भाजपा शासित उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमण के मामले देखे जा रहे हैं.

वहीं बिहार भी इस कड़ी में पीछे नहीं है. इलाज के अभाव में बिहार के कई अस्पतालों में कोरोना मरीज हर रोज दम तोड़ रहे हैं. ऐसा ही एक मामला पटना के राजेश्वर अस्तपाल से सामने आया है. बताया जाता है कि नोएडा के कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले राशन चंद्र दास कोरोना संक्रमित पाए गए थे. इसके चलते उन्हें भागलपुर के ग्लोकल नामक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया.

लेकिन यहां पर उनकी हालत काफी बिगड़ गई. जिसके बाद उन्हें मायागंज में रेफर कर दिया गया है. यहां पर भी उनके हालात में कोई सुधार नहीं आया. इसके बाद रोशन चंद्र दास का परिवार उन्हें पटना के राजेश्वर अस्पताल में लाया गया. जहां उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली है. इस मामले में एबीपी न्यूज़ के पत्रकार श्रावणी मिश्रा ने जानकारी देते हुए ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा है कि पति की मौत के बाद महिला ने रोते हुए कहा कि डॉक्टर उसके साथ छेड़खानी करता था, लेकिन वो उसे इसलिए इग्नोर करती रही क्योंकि उसका पति वहां भर्ती था.

जान तो छोड़िये इज्जत बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा अब. SICK रोशन चंद्र दास की मौत के बाद उनकी पत्नी ने कुछ खुलासे किए हैं. उन्होंने बताया है कि इलाज के दौरान ग्लोकल अस्पताल में एक कंपाउंडर ने उनके साथ छेड़खानी की, डॉक्टरों ने उनके साथ बदसलूकी की. यहां तक कि उनके पति का इलाज भी सही तरह से नहीं किया गया. इलाज के दौरान उनके पति तड़प रहे थे. इसी वजह से उनकी मौत हुई है.

पति की मौत के बाद फूट-फूटकर रोते हुए महिला ने कहा कि यह सब जल्लाद है, मेरे पति को बिना ऑक्सीजन के इन लोगों ने मार डाला. मृतक की पत्नी का कहना है कि अस्पताल प्रशासन अक्सर ऑक्सीजन बंद कर देते हैं. ताकि लोग मजबूर होकर ज्यादा कीमत पर ऑक्सीजन खरीदने के लिए दरबदर भटके. उन्होंने बताया कि अपने पति के लिए उन्होंने भी ऑक्सीजन खरीदी लेकिन फिर भी वह बच नहीं पाए.

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