Keshav Prasad Maurya Latest

आज उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पांचवें चरण की वोटिंग होनी है. सिराथू विधानसभा क्षेत्र में भी आज वोट डाले जाएंगे. यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) का मुकाबला यहां समाजवादी पार्टी की पल्लवी पटेल से है. मतदान से 24 घंटे पहले यहां दो घटनाएं हुई हैं, जो बता रही हैं कि केशव प्रसाद मौर्य इस चुनाव में कहां खड़े हैं.

मतदान से 24 घंटे पहले एक गांव में केशव प्रसाद मौर्य के बेटे योगेश मौर्य को घेर लिया गया. दूसरी घटना में एक वाहन से शराब की पेटियां बरामद हुई, उस शराब को सिराथू क्षेत्र में बांटने के लिए लाया जा रहा था. सिराथू इतनी हाई प्रोफाइल सीट है कि यहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) अपने डिप्टी सीएम का प्रचार करने आए थे. दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) भी यहां पल्लवी पटेल (Pallavi Patel) का प्रचार करने पहुंचे थे.

अखिलेश यादव के अलावा पार्टी की सांसद जया बच्चन और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव भी चुनाव प्रचार करने सिराथू पहुंची थी. गृहमंत्री अमित शाह की रैली में चारों तरफ बीजेपी की टोपी लगाए कार्यकर्ताओं का हुजूम नजर आया, तो अखिलेश यादव की रैली में आम लोगों का हुजूम नजर आया. यही हाल जया बच्चन और डिंपल यादव की रैली का भी था.

सिराथू पहले बहुजन समाज पार्टी के कब्जे में था. यहां के कुर्मी मतदाता ही निर्णायक है. 2012 में केशव प्रसाद मौर्य यहां से पहली बार बीजेपी के टिकट पर जीते थे. उसके बाद 2017 में भी वह जीते. इस बार समाजवादी पार्टी ने बहुत सूझबूझ से कुर्मी प्रत्याशी पल्लवी पटेल को टिकट दिया है. इस समीकरण से इस सीट पर हालात बदल गए हैं. अपना दल के संस्थापक डॉक्टर सोनेलाल पटेल कुर्मीयों के बड़े नेता रहे हैं, पल्लवी पटेल उन्हीं की बेटी है.

पल्लवी पटेल की मां कृष्णा पटेल भी दूसरे इलाके में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रही है. लेकिन पल्लवी की छोटी बहन अनुप्रिया पटेल केंद्र में मंत्री हैं और बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है. देखा जाए तो मां बेटी सपा में आकर सोनेलाल पटेल के विरासत की लड़ाई लड़ रही हैं. सोने लाल पटेल की विचारधारा कभी भी बीजेपी समर्थक नहीं रही है.

सिराथू में मुस्लिम मतदाताओं की भी जनसंख्या ठीक-ठाक है. मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव सपा की तरफ स्पष्ट तौर पर नजर आ रहा है. बीजेपी को उम्मीद थी कि मुस्लिम मतदाता बीएसपी को वोट देंगे जिसका फायदा बीजेपी को मिल जाएगा और केशव प्रसाद मौर्य के लिए आसानी होगी. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है. इस सीट को लेकर जो सर्वे आए हैं उसमें भी कहा गया है कि बीएसपी यहां मुस्लिम वोटों का बंटवारा नहीं कर पाएगी.

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम सिराथू से चुनाव लड़ रहे हैं. सिराथू में 3 लाख 80 हजार से ज्यादा मतदाता हैं. जिनमें 19 फ़ीसदी सवर्ण है, 33 फ़ीसदी दलित, 13 फ़ीसदी मुस्लिम और 34 फ़ीसदी ओबीसी वोट है. सवर्णों के वोट अकेले बीजेपी को नहीं मिलेंगे 2022 के चुनाव में यह भी कंफर्म है. 13 फ़ीसदी मुस्लिम वोटों का विभाजन भी नामुमकिन लग रहा है.

ब्राह्मणों का कुछ हिस्सा कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को मिलेगा. दलित वोटों में भी विभाजन तय है. अब ओबीसी में वोटों का विभाजन केशव प्रसाद मौर्य और पल्लवी पटेल के बीच होता है तो भी फायदे में समाजवादी पार्टी रहेगी. यह तय है कि सिराथू विधानसभा चुनाव विशुद्ध रूप से जातीय समीकरणों पर ही लड़ा जा रहा है.

पूरे चुनाव में समाजवादी पार्टी ने बीजेपी के ओबीसी चेहरे और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को राजनीतिक तौर पर नुकसान पहुंचाने के लिए कई बयान दिए हैं. सिराथू सीट के जरिए पूरे प्रदेश में मैसेज देने की कोशिश की गई है कि बीजेपी ने केशव प्रसाद मौर्य का सम्मान नहीं किया है और यह कई मौकों पर दिखा भी है. कई बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बीच तनाव देखने को मिला है.

केशव प्रसाद मौर्य ने तमाम तरह के विकास कार्यों के दावे किए हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उन विकास कार्यों की जानकारी डिप्टी सीएम के पास ही होगी. कुल मिलाकर यहां से केशव प्रसाद मौर्य के लिए आसान नहीं रहने वाला है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव शुरू हुए थे उससे पहले केशव प्रसाद मौर्य मथुरा में मंदिर बनाने की बात कर रहे थे. लेकिन अब स्थिति यह हो गई है कि उनके लिए सीट बचाना मुश्किल हो गया है.

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