Rakesh Tikait Varun Gandhi

पिछले 9 महीने से भी अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन जारी है. प्रदर्शनकारी किसान केंद्र की BJP सरकार द्वारा पारित किए गए तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं. विपक्षी पार्टियां भी किसान आंदोलन का समर्थन कर रही हैं. साथ ही सत्यपाल मलिक (Satya Pal Malik) और वरुण गांधी (Varun Gandhi) सरीखे कुछ BJP नेता भी किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं.

किसानों की मांग का समर्थन कर रहे भाजपा नेताओं से संपर्क साधने के सवाल पर किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने कहा है कि वैचारिक रूप से तो ये साथ हैं और 80% ऐसे हैं जो मुक्ति बंधन चाहते हैं. आजतक न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान जब पत्रकार ने किसान नेता राकेश टिकैत से सवाल पूछते हुए कहा कि अब आप कुछ गांवों में भी जा रहे हैं जहां बीजेपी के बड़े नेता रहते हैं.

इसपर जवाब देते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि गांव में तो बीजेपी के नेता रहते ही हैं, अगर हमें गांव के लोग बुला रहे हैं तो क्या हम उन गांवों में नहीं जा सकते हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हम कई गांव जाएंगे जिसमें एक गांव बीजेपी नेता व मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक का भी है. आगे उन्होंने कहा कि हमें उस भूमि को भी देखनी चाहिए जहां के लोग बड़े पदों पर रहते हुए भी बयान दे रहे हैं.

इसके बाद जब पत्रकार ने उनसे पूछा कि आप क्या सिर्फ सत्यपाल मलिक से ही संपर्क करेंगे या भाजपा में जितने भी लोग किसान आंदोलन का समर्थन कर रहें हैं जिसमें ख़ासतौर पर वरुण गांधी भी हैं, उनसे भी संपर्क करेंगे. इसपर राकेश टिकैत ने कहा कि वैचारिक रूप से सभी लोग साथ ही हैं, 80% लोग उस तरह के हैं.

राकेश टिकैत ने यह भी कहा जो मुक्ति अभियान में शामिल हो जाएंगे वे आ जाएंगे. ये तो नेता मुक्ति अभियान चाहते हैं और जो अपने चारों तरफ लगे बंधन से मुक्ति चाहते हैं. कुछ लोग इससे निकल जाते हैं और कुछ लोग चक्रव्यूह में फंसे रह जाते हैं. साथ ही उन्होंने भाजपा नेताओं से मुलाक़ात के सवाल पर कहा कि अगर कोई मिलना चाहे तो मुलाक़ात हो जाएगी, यहां तो लोग खुले तौर पर आ रहे हैं.

ज्ञात हो कि भाजपा सांसद वरुण गांधी ने पिछले दिनों भी किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार को दोबारा से बातचीत शुरू करने का आग्रह किया था. बीते दिनों मुजफ्फरनगर में हुई किसान महापंचायत को लेकर उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा था कि मुजफ्फरनगर में विरोध प्रदर्शन के लिये लाखों किसान इकट्ठा हुए. वे हमारे अपने ही हैं. हमें उनके साथ सम्मानजनक तरीके से फिर से बातचीत करनी चाहिए और उनकी पीड़ा समझनी चाहिए. उनके विचार जानने चाहिए और किसी समझौते तक पहुंचने के लिए उनके साथ मिल कर काम करना चाहिए.

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