Vladimir Putin

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर पूरी दुनिया के बीच हलचल जारी है. रूसी हमले का सामना करते हुए यूक्रेन की सेना उग्र तरीके से जवाब दे रही है. रूस को जो उम्मीद थी उस तरह की सफलता यूक्रेन में उसे अभी तक नहीं मिली हैं. रूस को यह उम्मीद थी कि 12 से 18 घंटे के बीच रूस यूक्रेन पर कब्जा कर लेगा, लेकिन अभी तक यह हो न सका है.

रूस की भारी बमबारी के बीच यूक्रेन को अमेरिका और यूरोप से सामरिक मदद मिलने लगी है. इन सबके बीच रूस की वित्तीय घेराबंदी भी हो रही है. वही यूक्रेन के लोग भी रूस से दो-दो हाथ करने के लिए आगे आ रहे हैं. 2 दिन के भीतर एक लाख से अधिक लोगों ने हथियार उठा लिए हैं.

इन सबके बीच एक सवाल उठ रहा है कि, क्या व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) किसी भी वक्त परमाणु हमले का ऑर्डर दे सकते हैं? क्या किसी भी वक्त युक्रेन युद्ध में परमाणु हमले की खबर आ सकती है? दरअसल पुतिन द्वारा की गई बात से दुनिया हिल गई है. अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, यूक्रेन समेत दुनिया के तमाम शक्तिशाली मुल्कों की रातों की नींद उड़ गई है.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुतिन द्वारा कही गई बात के बाद यूनाइटेड नेशन में आपातकालीन मीटिंग भी बुलानी पड़ी. पुतिन ने कहा कि नाटो देशों के टॉप अफसर हमारे देश के खिलाफ आक्रामक बयान बाजी कर रहे हैं. ऐसी सूरत में मुझे रक्षा मंत्री और चीफ ऑफ जनरल स्टाफ को न्यूक्लियर डेटरेंट फोर्स को हाई कॉम्बैट अलर्ट पर रखने का आर्डर देना पड़ा है.

यूक्रेन से जारी जंग के बीच रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने अपने पत्ते खोल दिए. अगर इस बात को समझा जाए तो पुतिन का इशारा यही है कि बात बिगड़ी तो परमाणु बम से प्रहार करने में पीछे नहीं हटेंगे. पुतिन ने इशारों इशारों में नाटो से जुड़े मूल्कों को खुल्लम-खुल्ला धमकी दे दी है. पुतिन द्वारा दी गई धमकी का मतलब यही है कि अगर यूक्रेन के समर्थन में नाटो सेना युद्ध के मैदान में उतरी तो अंजाम सिर्फ और सिर्फ परमाणु युद्ध है.

इसका मतलब यही है कि रूस परमाणु युद्ध के लिए तैयार है और वह भी पूरी तरीके से, इधर पुतिन का ऑर्डर आएगा और उधर परमाणु बम से हमला हो जाएगा. कई दशकों के बाद ऐसा हुआ है कि जब किसी ग्लोबल लीडर की तरफ से परमाणु युद्ध की धमकी दी गई है.

क्या चाहते हैं पुतिन?

पुतिन के अनुसार रूस और यूक्रेन के बीच समस्या का समाधान तभी होगा जब रूस के वैध सुरक्षा हितों को ध्यान में रखा जाए. रूस की मान्यता क्रीमिया प्रायद्वीप पर संप्रभुता, साथ ही साथ यूक्रेन का विसैन्यीकरण और निजी शासन से मुक्ति और इसकी तटस्थ स्थिति सुनिश्चित करना.

इसका मतलब यही हुआ कि पुतिन चाहते हैं यूक्रेन के अंदर ऐसी सरकार हो जो नाटो या फिर पश्चिमी यूरोप के बजाय मास्को की तरफ अपना रुख करें. चुकी यह सरकार पुनीत के इशारों पर नाचेगी इसलिए शायद या किसी तरह का लोकतंत्र हो. ऐसी सरकार यूक्रेन के अंदर 2010 से 2014 के बीच चली थी जो रूस समर्थित थी.

आपको बता दें कि यूक्रेन पर रूसी हमले के बीच दोनों देश अब बातचीत की टेबल पर भी आ चुके हैं. सोमवार को बेलारूस में रूस और यूक्रेन ने बात की ताकि युद्ध का मसला हल हो सके. यह चर्चा करीब 3.30 घंटे तक चली. जो जानकारी निकल कर आ रही है उसके मुताबिक अभी हालात पटरी पर नहीं आए हैं. आने वाले समय में हमले रुकेंगे या फिर बढ़ेंगे, इस बारे में कुछ भी कह पाना बहुत मुश्किल है. जानकारी निकलकर आ रही है कि अभी 1 रन की बातचीत हुई है इसके बाद दूसरे राउंड की भी बातचीत होगी.

आपको बता दें कि पहले दौर की बातचीत के तुरंत बाद ही रूस ने यूक्रेन की राजधानी और खारकीव में हमला कर दिया. वही यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने EU मे शामिल होने के लिए सदस्यता आवेदन पर हस्ताक्षर किए हैं. इन सब घटनाओं पर अगर गौर किया जाए तो यह समस्या जल्दी सुलझती हुई दिखाई नहीं दे रही है. यह समस्या जितनी आगे बढ़ेगी उतना ही खतरा इस बात का रहेगा कि और भी देश इस युद्ध में शामिल हो सकते हैं और अगर अमेरिका इस युद्ध में शामिल हुआ तो विश्व युद्ध के चांसेस बढ़ जाएंगे.

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