Azam Khan

जेल से रिहा हुए समाजवादी पार्टी के विधायक आजम खान (Azam Khan) ने 28 मुकदमों और अपनी जेल यात्रा को लेकर एक मीडिया चैनल से बातचीत की है. इस दौरान उन्होंने कहा है कि मेरे ऊपर दर्ज 90 फ़ीसदी मुकदमों में मेहरबानियां तो अपनों की है. इस घर को तो घर के चिराग से आग लगी है. साथ ही अखिलेश यादव को लेकर भी बयान दिया है.

एक मीडिया चैनल ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान (Azam Khan) से कई तरह के सवाल पूछा, जिसका जवाब उन्होंने बड़ी बेबाकी से दिया है. आजम खान से पूछा गया कि जेल जाने से पहले और 27 महीने बाद जेल से बाहर निकलने के बाद रामपुर और उत्तर प्रदेश की फिजा कैसी लग रही है? इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि लंबी थी गम की रात मगर रात ही तो थी, सवेरा तो होना ही था.

आगे की कानूनी लड़ाई कैसे लड़ेंगे? इस सवाल का जवाब देते हुए आजम खान (Azam Khan) ने कहा है कि झूठ, झूठ होता है. सच, सच होता है. सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह का फैसला सुनाया है वह ऐतिहासिक है. जिस संवैधानिक धारा का हवाला देकर मुझे अंतरिम जमानत मिली है उसकी आजाद भारत की पहली मिसाल हूं. शायद ही उत्तर प्रदेश का कोई जुडिशल ऑफिसर हो जिसे सच्चाई पता ना हो.

आजम खान (Azam Khan) से सवाल पूछा गया कि आप से जेल में मिलने शिवपाल सिंह यादव पहुंचे थे. अखिलेश यादव नहीं पहुंचे. आखिर वजह क्या है रही? इसका जवाब देते हुए आजम खान ने कहा कि अब उनके सामने क्या वजह रही होगी, मुझे नहीं पता और जिला प्रशासन की बड़ी पाबंदी थी मैं तो किसी से मिल ही नहीं सकता था, क्योंकि बड़ी पाबंदियां थी. मुझे बाहर की दुनिया के बारे में कुछ भी नहीं पता. बहुत छोटी सी कब्र में रहता था, जिसमें अंग्रेज फांसी देने से 1 दिन पहले रखा करते थे, उस कोठरी में रहता था.

आजम खान (Azam Khan) से सवाल पूछा गया कि समाजवादी पार्टी, अखिलेश यादव से कोई नाराजगी है? शिवपाल यादव को लेकर क्या कहेंगे? इसका जवाब देते हुए उन्होंने लिखा कि कोई नाराजगी नहीं है. मेरे उन्होंने क्या बिगाड़े हैं, जो नाराजगी होगी. मैं सपा का अदना सा कार्य करता हूं. मैं बड़े लोगों पर टिप्पणी नहीं कर सकता हूं.

सपा में रहेंगे? इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मैं हार्दिक पटेल नहीं हूं. यूपी में बाबा का बुलडोजर चलने पर क्या कहेंगे? इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे साथ क्राइम का शब्द मत जोड़िए. इसके अलावा ज्ञानवापी मामले पर आजम खान ने कहा है कि मुझे कुछ मालूम भी हो जाए तो मैं क्या कर सकता हूं? जो चल रहा है वह आप देख ही रहे हैं. बाबरी मस्जिद और ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में फर्क यह है कि बाबरी की लड़ाई 4 दहाई चली और यह वाले मामले में सिविल से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सारी प्रक्रिया एक साथ चली और चल रही है. ऐसे हालात में न्यायिक व्यवस्था के खिलाफ किसी को भी नहीं बोलना चाहिए. माहौल अच्छा रहना चाहिए.

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