Kapil Sibal Gandhi famil

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के नेतृत्व पर भरोसा जताए जाने के बाद अब एक बार फिर से g-23 गुट की तरफ से गांधी परिवार (Gandhi family) के नेतृत्व के खिलाफ फिर से मोर्चा खोल दिया गया है और इसकी अगुवाई इस बार गुलाम नबी आजाद ने नहीं बल्कि कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने की है.

यह हर कोई जानता है कि g-23 गुट के अधिकतर नेता जनाधार विहीन है. गांधी परिवार के बड़प्पन के कारण ही इन्हें हमेशा कांग्रेस में बड़े-बड़े पद मिलते रहे हैं. जिस वक्त कांग्रेस की सरकारें रही उस वक्त गुलाम नबी आजाद से लेकर कपिल सिब्बल तक कांग्रेस के अंदर बड़े-बड़े पदों पर रहे. कांग्रेस की सरकारों में मंत्री तक रहे. उसके बाद जब सरकार नहीं रही तो भी इन्हें राज्यसभा तक भेजा गया.

जिम्मेदारी से भागते g-23 के नेता

लेकिन उन्होंने कांग्रेस के लिए क्या किया? गुलाम नबी आजाद को हरियाणा से लेकर उत्तर प्रदेश तक का प्रभार दिया गया, प्रभारी बनाया गया. कई बार गुलाम नबी आजाद के प्रभारी रहते हुए कई राज्यों में कांग्रेस चुनाव लड़ी और बुरी तरीके से हारी. लेकिन उस वक्त g-23 गुट के किसी भी नेता ने इस पर कोई सवाल नहीं किया, जिम्मेदारी नहीं ली. गुलाम नबी आजाद ने भी कभी अपने नेतृत्व में हुई हार की समीक्षा की मांग नहीं की.

बैठक में सोनिया गांधी ने कई मुद्दों पर चर्चा की और एक बार फिर से उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफे की बात की. लेकिन तमाम कांग्रेस के नेताओं ने उन्हें पद पर बने रहने का आग्रह किया और उसके बाद कपिल सिब्बल एक बार फिर से मीडिया में आकर बयान दे रहे हैं कि गांधी परिवार से हटकर किसी को अध्यक्ष बनाना चाहिए. आखिर कपिल सिब्बल चाहते क्या हैं?

पिछले कई सालों से और बीते पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी दिखाई दिया है कि सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने जी भर के जनता के बीच जनता की लड़ाई लड़ी. भले ही नतीजे कांग्रेस की उम्मीदों के मुताबिक नहीं थे. लेकिन जनता की आवाज उठाने में गांधी परिवार के दो सदस्यों ने कोई कसर नहीं छोड़ी. इसके अलावा ऐसा कौन सा नेता है जिन्होंने जनता की लड़ाई लड़ी, संघर्ष किया, कपिल सिब्बल उसका नाम सामने क्यों नहीं रख रहे हैं?

जिस वक्त पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव चल रहे थे उस वक्त कपिल सिब्बल और बाकी g-23 गुट के नेता कहां थे? कांग्रेस को मजबूत करने के लिए, कांग्रेस का जनाधार बढ़ाने के लिए, कांग्रेस की जीत के लिए पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव में इन्होंने सक्रिय भूमिका क्यों नहीं निभाई? उस वक्त तो यह मीडिया में भी नहीं थे और जनता के बीच भी नहीं थे, तो कहीं ऐसा तो नहीं कि यह कांग्रेस की हार का इंतजार कर रहे थे, ताकि गांधी परिवार पर सवाल उठाए जा सकें?

कपिल सिब्बल और बाकी इनके साथ के नेताओं से सवाल

कपिल सिब्बल और बाकी के इनके साथ के नेताओं का कहना है कि गांधी परिवार से हटकर किसी को अध्यक्ष बनाया जाए. मतलब यह साफ कह रहे हैं कि राहुल गांधी को किनारे बैठ जाना चाहिए. राहुल गांधी इस वक्त कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं है, सिर्फ एक सांसद हैं. लेकिन पिछले कुछ सालों में बीजेपी मोदी तथा आरएसएस के खिलाफ डटकर कोई मुकाबला कर रहा है, उन्हें परेशान कर रहा है, तो सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी है. तो क्या कपिल सिब्बल चाहते हैं कि मोदी से सवाल पूछने वाला कोई ना हो? आरएसएस के खिलाफ बोलने वाला कोई ना हो?

कहीं ऐसा तो नहीं है कि कपिल सिब्बल और उनके साथियों पर मोदी और आरएसएस का दबाव है कि कैसे भी करके राहुल गांधी को रास्ते से हटाया जाए? सवाल तो उठेगा. क्योंकि कांग्रेस का कोई ऐसा नेता पिछले 8 सालों में दिखाई नहीं दिया है जो मोदी की आंख में आंख डाल कर बात करें, आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ खुलकर बोले वोट बैंक की परवाह किए बिना.

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