Delhi Municipal Corporation Election

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली नगर निगम चुनाव (Delhi Municipal Corporation Election) में बहुमत हासिल कर लिया है. अरविंद केजरीवाल के तीन बार दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला मौका है जब एमसीडी पर भी आम आदमी पार्टी का कब्जा हो गया है. दिल्ली एमसीडी चुनाव में पार्टी की जीत पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों को इस जीत के लिए बधाई दी और बदलाव लाने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जीत के बाद कहा कि 15 साल की कांग्रेस की सत्ता को खड़ा था दिल्ली से और अब 15 साल की एमसीडी को भी उखाड़ दिया है.

पूरी आम आदमी पार्टी दिल्ली एमसीडी चुनाव में जीत के बाद काफी खुश नजर आ रही है. लेकिन इसके साथ ही कांग्रेस को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं. लेकिन कुछ आंकड़े ऐसे हैं जो यह बताते हैं कि कांग्रेस 9 सीटें जीतकर भी आम आदमी पार्टी पर भारी पड़ गई है. एमसीडी चुनाव में बीजेपी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर नजर डालना जरूरी है. क्योंकि तीनों ही पार्टियों ने विभिन्न वार्डों से मुस्लिम प्रत्याशियों को उतारा था.

कांग्रेस ने 24 मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे तो वही आम आदमी पार्टी ने 12 मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया था और बीजेपी ने 4 मुस्लिम प्रत्याशियों को चुनावी मदान में उतारा था. इसमें सबसे ख़राब प्रदर्शन बीजेपी का रहा. बीजेपी ने 4 मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया था लेकिन चारों को हार का सामना करना पड़ा है. वही जो महत्वपूर्ण मुस्लिम सीटें थी वहां पर आम आदमी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है. आम आदमी पार्टी के 12 मुस्लिम प्रत्याशियों में से सिर्फ 6 ही जीत पाए.

कांग्रेस एमसीडी चुनाव में 9 सीटों पर जीती है. लेकिन इनमें से 7 मुस्लिम पार्षद हैं जिन्होंने 7 में जीत हासिल की है और इस बार एमसीडी में सबसे ज्यादा मुस्लिम पार्षद कांग्रेस के ही होंगे. दिल्ली का ओखला इलाका कांग्रेस का गढ़ रहा है. लेकिन आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान के बतौर मुस्लिम नेता उभरने के बाद यहां कांग्रेस कमजोर नजर आने लगी थी. कांग्रेस के पूर्व विधायक मोहम्मद आसिफ कई विवादों में घिर गए लेकिन ओखला के दो वार्ड में कांग्रेस ने शानदार वापसी की है.

मुस्लिमों के समर्थन में बोलने से जिस तरह से आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित तमाम आम आदमी पार्टी के दूसरे बड़े नेता बचते नजर आए, उससे ऐसा लग रहा है कि दिल्ली में मुस्लिम मतदाता आम आदमी पार्टी से दूरी बनाने लगा है. विधानसभा चुनावों में जहां मुस्लिम वोटरों ने आम आदमी पार्टी को एकतरफा वोट दिया था वही एमसीडी चुनावों में मुस्लिम मतदाता आम आदमी पार्टी से दूरी बनाता हुआ नजर आया है और वह एक बार फिर से कांग्रेस का रुख करता हुआ नजर आ रहा है. इसका फायदा निश्चित रूप से आने वाले चुनाव में कांग्रेस को मिल सकता है.

इसके अलावा आपको बता दें कि जिस बीजेपी का पूरे देश में इस वक्त सिक्का चल रहा है उसी बीजेपी को देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर आम आदमी पार्टी से करारी शिकस्त मिली है. विधानसभा चुनावों में बीजेपी 24 साल से सत्ता से बाहर है वही 15 साल की सत्ता के बाद एमसीडी से भी एग्जिट हो गई है. इसकी सबसे बड़ी वजह दिल्ली में बीजेपी के बड़े चेहरे का ना होना भी माना जा रहा है. दिल्ली बीजेपी में केंद्रीय नेतृत्व ने कई प्रयोग किया लेकिन कोई कामयाब होता हुआ दिखाई नहीं दिया.

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