Gujrat BJP

गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे गुरुवार को आ गए और बीजेपी ने लगातार सातवीं बार सत्ता हासिल कर ली. गुजरात में इससे पहले कभी भी किसी भी पार्टी को इतने लंबे समय तक शासन करने का अवसर नहीं मिला था. पिछले 27 साल से बीजेपी गुजरात की सत्ता में है और यह कार्यकाल पूरा होने पर उनका शासनकाल 32 वर्ष का हो चुका होगा, जो अपने आप में एक नया रिकॉर्ड होगा.

गुजरात में इस बार कांग्रेस जिस तरह से हारी है वह इस चुनाव को शायद ही याद रखना चाहेगी. गुजरात के विधानसभा चुनाव में इस बार बीजेपी की सबसे बड़ी जीत के साथ ही कांग्रेस की करारी हार की चर्चा भी कई सालों तक होती रहेगी. 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को कड़ी टक्कर देने वाली कांग्रेस इस बार 20 सीटों के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कांग्रेस की गुजरात में इतनी खराब स्थिति क्यों हुई?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गुजरात में कांग्रेस की ऐसी स्थिति का अगर आकलन किया जाए तो पहला कारण यह समझ में आता है कि केंद्रीय नेतृत्व चुनाव प्रचार से दूरी बनाए रहा. भारत जोड़ो यात्रा निकाल रहे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सिर्फ 1 दिन के लिए चुनाव प्रचार करने गुजरात पहुंचे थे. अंतिम दिनों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कुछ चुनावी सभाएं की लेकिन इससे पार्टी को कोई फायदा नहीं हुआ. 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने गुजरात में धुआंधार चुनाव प्रचार किया था. वैसा ही कुछ प्रचार इस बार भी कांग्रेस को चाहिए था, जो नहीं हुआ.

राहुल गांधी गुजरात में चुनाव प्रचार करने तो सिर्फ 1 दिन के लिए आए लेकिन प्रियंका गांधी 1 दिन के लिए भी गुजरात में चुनाव प्रचार करने नहीं गईं. इससे शायद पार्टी के चुनाव प्रचार पर खराब असर पड़ा और गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी जैसे तैसे चुनाव अभियान चलाती रही.

2017 में कांग्रेस ने जिस आक्रामक ढंग से गुजरात में चुनाव प्रचार किया था उसकी छाप भी इस बार दिखाई नहीं दी और कांग्रेस से ज्यादा आम आदमी पार्टी और इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल को मीडिया में दिखाया जा रहा था और मीडिया में बीजेपी और आम आदमी पार्टी की लड़ाई बताई जा रही थी, इसका भी नुकसान कांग्रेस को बड़े स्तर पर हुआ है.

राजनीतिक जानकार कांग्रेस की बुरी हार की एक बड़ी वजह आम आदमी पार्टी को भी मान रहे हैं. आम आदमी पार्टी ने इस चुनाव में लगभग 13% वोट हासिल किया है और उसने कांग्रेस के वोट शेयर में जबरदस्त सेंध लगाई है, जबकि बीजेपी का वोट शेयर कम नहीं हुआ बल्कि लगभग 4 फ़ीसदी बढ़ा है. कांग्रेस को 2017 के विधानसभा चुनाव में 41 फ़ीसदी वोट मिले थे जबकि इस बार वह 27 फ़ीसदी वोट ही हासिल कर पाई है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस को अपने बड़े चुनावी रणनीतिकार अहमद पटेल की भी कमी इस बार महसूस हुई है. 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान अहमद पटेल राहुल गांधी को लगातार सलाह देते रहे. लेकिन इस बार राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा में शामिल रहे और सिर्फ 1 दिन प्रचार के लिए पहुंचे, ऐसे में अहमद पटेल के ना होने और राहुल गांधी की गैरमौजूदगी ने कांग्रेस के चुनाव प्रचार को बेहद कमजोर कर दिया. हालांकि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनावी जनसभाएं जरूर की लेकिन उसका बहुत ज्यादा असर नहीं हुआ.

कांग्रेस भले ही 1995 से गुजरात की सरकार में नहीं आई हो लेकिन विधानसभा चुनाव में उसका वोट प्रतिशत हमेशा 40 या इससे अधिक रहा. बीजेपी के लगातार जीत के बाद भी गुजरात में कांग्रेस को वोट देने वाले लोग उसकी सुस्ती की वजह से भी इस बार उसके साथ खड़े नहीं हुए और उन्होंने बीजेपी और आम आदमी पार्टी को अपना वोट दिया, जिसकी वजह से कांग्रेस इस चुनाव में पूरी तरीके से पस्त हो गई.

इसके अलावा जब 10 मार्च को पांच राज्यों के चुनावी नतीजे आए थे और इनमें से 4 राज्यों में बीजेपी को जीत मिली थी. उसके अगले ही दिन प्रधानमंत्री मोदी ने अहमदाबाद में बड़ा रोड शो किया था. प्रधानमंत्री मोदी के साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उसी वक्त से गुजरात में चुनाव प्रचार की कमान संभाल ली थी और उसके बाद से ही धुआंधार प्रचार बीजेपी का जारी रहा और प्रधानमंत्री मोदी ने कई दौरे किए. अमित शाह ने 140 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बीजेपी ने धुआंधार प्रचार किया.

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