Gujarat Election Result 2022

गुजरात (Gujarat Election Result 2022) में आज वोटों की गिनती होनी है और आज ही तय हो जाएगा कि क्या बीजेपी लगातार सातवीं बार सरकार बनाकर वाममोर्चा के सबसे लंबे कार्यकाल के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेगी या कांग्रेस 27 साल के वनवास से वापस लौट आएगी या फिर आम आदमी पार्टी दिल्ली एमसीडी की तरह गुजरात में झाड़ू फेरेगी. अगले कुछ घंटे गुजरात के साथ देश की राजनीति के लिए काफी अहम माने जा रहे हैं और इसके साथ ही कांग्रेस के लिए भी काफी अहम है.

Gujarat Election Result 2022

अगर कांग्रेस गुजरात का विधानसभा चुनाव (Gujarat Election Result 2022) जीत जाती है तो यह कांग्रेस की धमाकेदार वापसी होगी और अगर हार जाती है तो कांग्रेस के लिए काफी मुश्किलें पैदा होने वाली है आने वाले कुछ सालों में. गुजरात में दूसरे चरण के मतदान के बाद तमाम एग्जिट पोल्स में बीजेपी की धमाकेदार जीत बताई जा रही थी. लेकिन जिस तरह से दिल्ली एमसीडी के चुनाव में एग्जिट पोल धराशाई हुए हैं उससे कहीं ना कहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गुजरात में भी उलटफेर संभव हो सकता है.

पिछली बार के मुकाबले इस बार गुजरात में 5% कम वोटिंग हुई है. गुजरात को राजनीतिक जानकार चार हिस्सों में बांट कर देखते हैं और यह है मध्य, उत्तर, दक्षिण और सौराष्ट्र- कच्छ. इनमें सबसे अधिक वोटिंग दक्षिण गुजरात में हुई है. दक्षिण गुजरात में वोटिंग का आंकड़ा 70.38% रहा. गुजरात में अब तक बनी सरकारों की बात की जाए तो 1960 में राज्य बनने के बाद से 1975 तक कांग्रेस की सरकार रही. 1975 में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी. लेकिन अगले ही चुनाव यानी 1980 में कांग्रेस ने सत्ता में वापसी कर ली.

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गुजरात में 1975 के 15 साल बाद यानी 1990 में एक बार फिर गैर कांग्रेसी सरकार बनी. लेकिन रियल टर्निंग प्वाइंट आया है 1995 में जब बीजेपी ने पहली बार अपने दम पर सरकार बनाई तब केशुभाई पटेल राज्य के मुख्यमंत्री बने थे. 2001 में बीजेपी ने पटेल को हटाकर नरेंद्र मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया. इसके बाद लगातार बीजेपी की सरकार गुजरात में रही है. पिछले विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो बीजेपी ने मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा था लेकिन सरकार बनाने के बावजूद उसकी सीटें घट गई थी.

27 वर्षों से गुजरात में बीजेपी सत्ता में है लेकिन इस बार कांग्रेस के साथ-साथ आम आदमी पार्टी से भी उसे कड़ी चुनौती मिल रही है और अगर आम आदमी पार्टी बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब हुई तो इसका सीधा लाभ कांग्रेस को मिल सकता है और बीजेपी को इसका भारी खामियाजा उठाना पड़ सकता है. क्योंकि आम आदमी पार्टी ने शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है और गुजरात का शहरी इलाका बीजेपी का गढ़ माना जाता है.

गुजरात के ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस की आज भी अच्छी खासी मौजूदगी दिखाई देती है और अगर ग्रामीण मतदाता कांग्रेस के साथ होते हैं और शहरी मतदाताओं में आम आदमी पार्टी सेंध लगाने में कामयाब होती है तो बीजेपी के लिए गुजरात में सरकार बनाना मुश्किल हो सकता है.

जिस तरह से आम आदमी पार्टी ने गुजरात में चुनाव प्रचार शुरू किया था उससे ऐसा लग रहा था कि मुस्लिम मतदाता बीजेपी को हराने के लिए गुजरात में केजरीवाल का समर्थन करेगा. लेकिन दिल्ली एमसीडी चुनाव पर अगर नजर डाली जाए तो आम आदमी पार्टी ने 53 फ़ीसदी मुस्लिम वोट हासिल किया है. लेकिन यह 2020 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले 14 फ़ीसदी कम है. जबकि कांग्रेस ने दिल्ली नगर निगम चुनाव में 30 फ़ीसदी मुस्लिम वोट हासिल किया है, लेकिन यह 2020 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले 13 फ़ीसदी अधिक है.

कांग्रेस ने दिल्ली एमसीडी के चुनाव में कुल 24 मुस्लिमों को टिकट दिया था और उनमें से सात जीत कर आए हैं. लेकिन खास बात यह है कि कांग्रेस के 6 कैंडिडेट ने आम आदमी पार्टी के ही उम्मीदवारों को हराकर चुनाव जीता है. इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि मुस्लिम मतदाता आम आदमी पार्टी को छोड़कर एक बार फिर कांग्रेस की तरफ जा रहा है. बिलकिस बानो सहित तमाम मुस्लिम मुद्दों पर केजरीवाल की खामोशी मुसलमानों को एक बार फिर से कांग्रेस की तरफ ले जा रही है. इसका फायदा भी कांग्रेस को गुजरात में होने की संभावना है.

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