Achok chandna Sachin Pilot

गुर्जर आरक्षण आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की अस्थियों का विसर्जन पुष्कर के 52 घाटों पर सोमवार शाम करीब 4:00 बजे हुआ. इससे पहले पुष्कर के मेला ग्राउंड में एमबीसी समाज की सभा हुई, इसमें खेल राज्य मंत्री अशोक चांदना जैसे ही भाषण देने आए लोगों ने जूते और अन्य सामान फेंक कर विरोध जताना शुरू कर दिया. नारे लगाए जा रहे थे सचिन पायलट जिंदाबाद. इस घटना के बाद राजस्थान कांग्रेस के अंदर एक बार फिर आपसी मनमुटाव साफ नजर आ रहा है.

अशोक चांदना ने ट्वीट करके गुस्सा जाहिर किया है. उन्होंने लिखा है कि मुझ पर जूते फिकवाकर सचिन पायलट यदि मुख्यमंत्री बनें तो जल्दी बन जाए, क्योंकि आज मेरा लड़ने का मन नहीं है. जिस दिन मैं लड़ने पर आ गया फिर एक ही बचेगा और यह मैं चाहता नहीं हूं. सोमवार को सबसे पहले गुर्जर भवन में स्थापित कर्नल बैंसला की मूर्ति का अनावरण किया गया. इसके बाद सभा की शुरुआत सोमवार सुबह करीब 10 बजे हुई. इस दौरान कर्नल बैंसला के योगदान को याद किया गया.

सभा स्थल पर गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विजय बैंसला सहित अन्य लोगों ने व्यवस्थाएं संभाली, इस दौरान सभा स्थल पर फूलों की वर्षा की गई. हंगामे और जूते फेंकने के मामले में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विजय बैंसला ने कहा कि यह हादसा है, यह कम्युनिटी सेंटीमेंट नहीं. जो हुआ वह एक कोने में बैठे कुछ लोगों ने किया. जिन्होंने जूते फेंके दो चार जूते हमारे पास हैं आकर ले जाएं. सचिन पायलट को लेकर नाराजगी थी कि वह नहीं आ पाए. वह बिजी रहे होंगे, लोग समझ नहीं पाए. जिन को समझ में आई वह चुप थे. कार्यक्रम में दोनों पार्टियों के लोग थे, कोई विवाद नहीं.

गुर्जरों ने बढ़ाया सियासी पारा

इस सभा में सचिन पायलट नहीं पहुंचे थे. ना ही इंद्राज गुर्जर, जी आर खटाणा सहित पायलट गुट के दूसरे गुर्जर विधायकों ने हिस्सा लिया. वहीं दूसरी तरफ वैभव गहलोत और अशोक गहलोत के सबसे करीबी नेताओं में से एक धर्मेंद्र राठौड़ मौजूद थे. ऐसे में अशोक गहलोत गुट गुर्जरों का समर्थन हासिल कर अप्रत्यक्ष रूप से पायलट गुट को चुनौती देने और गुर्जर समाज में खुद को मजबूत करने की कोशिश करता हुआ दिखाई दे रहा है. भाजपा भी इस समाज में पैठ बनाने की कोशिश करती हुई दिखाई दे रही है, क्योंकि इसमें भाजपा के कई नेताओं ने हिस्सा लिया.

लगभग डेढ़ दशक तक आरक्षण आंदोलन ने गुर्जरों को चर्चाओं में रखा. लंबे संघर्ष के बाद 2019 में गुर्जरों को 5% आरक्षण मिला. अब गुर्जरों का फोकस राजस्थान में मजबूत राजनीतिक जमीन तलाशने पर शिफ्ट हो गया है. राजस्थान में गुर्जरों की आबादी 5.5% मानी जाती है. यहां की 200 विधानसभा सीटों में से लगभग 75 सीटों पर गुर्जर प्रभाव डालते हैं. इनमें से 15 सीटें तो पूरी तरह गुर्जर बहुल इलाकों की हैं, जिनमें गुर्जर ही एकमात्र विकल्प हैं. वहीं 55 से 60 सीटें ऐसी हैं जहां गुर्जर दूसरी या तीसरी बड़ी जाति के रूप में है, जहां वह चुनाव में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं. इस बार 8 गुर्जर विधायक हैं जिसमें बीजेपी के एक भी नहीं है.

अब तक आरक्षण आंदोलन के लिए देशभर में पहचाने जाने वाले राजस्थान के गुर्जर समाज ने पहली बार अपने राजनीतिक हक की लड़ाई के लिए एकजुटता दिखाई है. आरक्षण दिलाने के लिए उग्र आंदोलनों से लोकप्रिय हुए स्वर्गीय कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की अस्तियों के पुष्कर में विसर्जन कार्यक्रम में गुर्जर समाज का पॉलीटिकल एंबिशंस आफ दिखाई दिया. कर्नल बैंसला के बेटे विजय बैंसला की अगुवाई में 17 अगस्त को झुंझुनू के खेतड़ी से शुरू हुई अस्थि विसर्जन यात्रा सोमवार को 26 वें दिन पुष्कर में खत्म हुई. इसमें भाजपा तथा कांग्रेस के कई नेता मौजूद थे.

राजस्थान में कुछ ही वक्त बाद विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में मकसद यही था कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए एकजुट हो रही इन जातियों पर किसी भी तरह से अपना प्रभाव छोड़ा जा सके. वहीं गुर्जर समाज से ही आने वाले पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का ना आना भी कई तरह के संकेत दे रहा है. गुर्जरों की इस सभा में जहां बीजेपी से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित कई बीजेपी नेता मौजूद रहे, वहीं कांग्रेस से मंत्री शकुंतला रावत अशोक चांदना जैसे नेताओं की मौजूदगी थी.

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