Nitin Gadkari news

बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और मौजूदा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने गुरुवार को मीडिया के 1 वर्ग पर राजनीतिक लाभ के लिए मनगढ़ंत अभियान चलाने का आरोप लगाया है. उन्होंने इससे संबंधित कई ट्वीट किए हैं. केंद्रीय मंत्री ने अपनी सरकार पार्टी और लाखों कार्यकर्ताओं के हित में कानून कार्रवाई की चेतावनी तक दे दी. नितिन गडकरी ने एक के बाद एक ट्वीट उन खबरों के बीच किया, जिनमें कहा जा रहा था कि बीजेपी और संघ नेतृत्व उनके सार्वजनिक बयानों से नाराज हैं.

मीडिया के हवाले से जो खबरें निकल कर आ रही थी उसमें दावा किया जा रहा था कि गडकरी को इस माह की शुरुआत में पार्टी के संसदीय बोर्ड से इसलिए हटा दिया गया क्योंकि बीजेपी और आरएसएस नेतृत्व उनके बार-बार के तानों से खुश नहीं था. नितिन गडकरी के कार्यालय द्वारा कहा गया है कि 2018 के बाद से ऐसे कई उदाहरण हैं जब उनके बयानों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है.

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में नितिन गडकरी के करीबी लोगों की तरफ से दावा किया गया है कि ज्यादातर बयानों को विवाद पैदा करने की नियत से संदर्भ से हटा कर पेश किया गया. यह सब मीडिया और सोशल मीडिया के फ्रिंज एलिमेंट द्वारा किया गया. इससे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम और दुविधा पैदा हुई. आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक के बाद एक कई ट्वीट करके नाराजगी जताई है.

नितिन गडकरी ने लिखा कि आज एक बार फिर मुख्यधारा की मीडिया, सोशल मीडिया के कुछ वर्ग और विशेष रूप से कुछ लोगों ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए मेरे बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश करके नापाक और मनगढ़ंत अभियान जारी रखने का प्रयास किया है. हालांकि मैं फ्रिंज एलिमेंट के इस तरह के दुर्भावनापूर्ण एजेंडे से कभी परेशान नहीं हुआ हूं. लेकिन फिर भी सभी संबंधित लोगों को चेतावनी देता हूं कि मैं अपनी सरकार, पार्टी और हमारे लाखों कार्यकर्ताओं के व्यापक हित में उन्हें कानून के दायरे में ले जाने से नहीं पीछे हटूंगा.

आपको बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले नितिन गडकरी के नाम को प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर उछाला गया था. कहा जा रहा था कि यह भी एक शरारत थी. ना नितिन गडकरी और ना ही उनके कार्यालय ने यह अभियान शुरू किया. इसके अलावा आपको बता दें कि समय-समय पर नितिन गडकरी के बयान सुर्खियों में रहते हैं. गडकरी के बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल भी होते हैं. कई बार उनके बयानों के आधार पर मौजूदा मोदी सरकार की आलोचना भी होती है.

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