Rahul Gandhi Bjp

मीडिया की और तमाम सर्वे एजेंसियों की अगर मानी जाए तो प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता सातवें आसमान पर है. मीडिया के अनुसार देश के गृह मंत्री और बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह राजनीति के चाणक्य हैं. लेकिन इन सबके बावजूद बीजेपी नेतृत्व को सबसे अधिक परेशानी किसी नाम से है तो वह राहुल गांधी (Rahul Gandhi) हैं. पिछले कुछ सालों में ऐसा लगता है कि सब कुछ बीजेपी के हिसाब से चल रहा है. मीडिया भी बीजेपी के ही मुद्दों को हवा देती हुई दिखाई देती है. बीजेपी की प्रचार एजेंसियों ने और मीडिया ने राहुल गांधी की बातों के वजन को हमेशा कम करने का काम किया है, लेकिन अब सब कुछ उल्टा हो रहा है.

अमित शाह जब से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने उसके बाद से ही बीजेपी ने एक के बाद एक कई ऊंचाइयों को छुआ. मीडिया ने उन्हें चाणक्य की उपाधि दी. राजनीतिक गलियारों में बीजेपी से जुड़े हुए लोग अमित शाह को चाणक्य बोलने लगे. राहुल गांधी ने हर वक्त जनता के मुद्दों पर चुनाव लड़ा लेकिन राहुल गांधी को सफलता हाथ नहीं लगी. वहीं दूसरी तरफ हिंदू-मुसलमान, मंदिर-मस्जिद, पाकिस्तान जैसे मुद्दों को हवा देकर बीजेपी चुनाव दर चुनाव सफलता हासिल करती रही और अमित शाह राजनीति के तथाकथित चाणक्य बनते गए.

लेकिन अब राहुल गांधी जरूरत से ज्यादा बीजेपी को परेशान करने लगे हैं. तमाम प्रचार एजेंसियों और संसाधनों के होने के बावजूद बीजेपी राहुल गांधी को रोक पाने में नाकाम साबित हो रही है. भले ही राहुल गांधी को अभी सफलता राजनीतिक रूप से ना मिल रही हो, लेकिन उनकी बातों का वजन अब दिखाई दे रहा है. बीजेपी उनकी बातों की काट नहीं ला पा रही है. मीडिया भी अब चाह कर भी राहुल गांधी के बयानों को तोड़ मरोड़ कर पेश नहीं कर पा रही है. कांग्रेस अब पहले से ज्यादा आक्रामक दिखाई दे रही है. राहुल गांधी अब उन्हीं मुद्दों पर बीजेपी को परेशान करने लगे हैं जिन मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी जनता के बीच वोट मांगते रहे हैं.

बिलकिस बानो का मुद्दा तमाम क्षेत्रीय दलों और बीजेपी के लिए परेशान करने वाला है.

पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से महिला सम्मान की बात की. इसके अलावा 2014 में भी “बहुत हुआ नारी पर वार, अबकी बार मोदी सरकार” जैसे महिलाओं के वोट बैंक को टारगेट करने वाले नारों के सहारे बीजेपी ने और खास तौर पर प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं का वोट लिया. लेकिन बीजेपी के ही गढ़ गुजरात, जहां लंबे समय तक मोदी मुख्यमंत्री रहे हैं वहां एक महिला के साथ दुराचार करने वाले अपराधियों को बीजेपी की गुजरात सरकार ने माफी देकर जेल से छुड़वा दिया और उसके बाद कुछ लोगों ने उन अपराधियों को फूल माला और मिठाइयों से स्वागत तक कर दिया. इससे कहीं ना कहीं प्रधानमंत्री मोदी की किरकिरी हुई है.

बिलकिस बानो के अपराधियों के छूट जाने पर तमाम क्षेत्रीय दल बोल पाने की स्थिति में नहीं है. क्योंकि उन्हें लग रहा है कि बिलकिस बानो एक धर्म विशेष से आती हैं और अगर बिलकिस बानो के समर्थन में, अपराधियों के विरोध में कुछ बोला तो एक धर्म विशेष का वोट उन्हें नहीं मिलेगा और ऐसा सोचने वालों में केजरीवाल से लेकर अखिलेश यादव तक शामिल नजर आ रहे हैं. क्योंकि इस पूरे मामले पर किसी भी क्षेत्रीय दल का स्टेटमेंट नहीं आया है. कुछ को अगर छोड़ दिया जाए तो. केजरीवाल बकायदा गुजरात में विधानसभा चुनाव लड़ने वाले हैं और केजरीवाल मुस्लिम समुदाय के मुद्दे पर कम ही बोलते हुए दिखाई दिए हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि इससे हिंदू वोट बैंक उनसे छिटक सकता है और उनको लगता है कि मुस्लिम कुछ भी हो जाए उन्हें वोट जरूर देंगे.

बिलकिस बानो के मुद्दे पर बिना वोट बैंक की परवाह किए कांग्रेस लगातार बीजेपी पर आक्रामक नजर आ रही है. राहुल गांधी बिलकिस बानो के मुद्दे पर बीजेपी पर हमले कर रहे हैं. गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं और जिस तरह से पिछले कुछ सालों में राजनीतिक परिवर्तन हुआ है उसको देखते हुए कहीं ना कहीं एक धर्म विशेष का वोट कांग्रेस के हाथ से निकल सकता है. इसके बावजूद राहुल गांधी लगातार अन्याय के खिलाफ आवाज को बुलंद किए हुए हैं.

लेकिन एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस किसी भी मुद्दे पर, जहां अत्याचार होता है, अन्याय होता है आवाज उठाते हैं. लेकिन जब वोट देने की बारी आती है तो वहीं समुदाय क्षेत्रीय दलों को वोट दे देता है, भले ही उनके मुद्दे पर वह क्षेत्रीय दल चुप रहे, लेकिन चुनाव के वक्त उन्हें वोट मिल जाता है. राहुल गांधी जिस तरह से बिना वोट बैंक की परवाह किए बीजेपी को हर मुद्दे पर बैकफुट पर जाने पर मजबूर कर रहे हैं, वह कहीं ना कहीं यह दर्शाता है कि तमाम संसाधनों और एजेंसियों के होते हुए भी अब बीजेपी राहुल गांधी से परेशान होने लगी है.

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