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चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है. कोर्ट ने बुधवार को केंद्र से उनकी नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज तलब किए हैं. संवैधानिक बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान केंद्र ने गोयल की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज दिखाने पर आपत्ति जताई. केंद्र का कहना था कि इसकी कोई जरूरत नहीं है, लेकिन कोर्ट ने दो टूक कहा है कि आप दस्तावेज पेश कीजिए.

अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि हम देखेंगे कि नियुक्ति में कहीं कुछ गलत तो नहीं हुआ. वहीं इस मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को करेगा. चुनाव आयोग की शक्तियों की बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जिरह के दौरान मंगलवार को कहा था कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर टीएन सेशन की तरह के सुदृढ़ चरित्र वाले व्यक्ति को चाहते हैं.

कोर्ट ने कहा कि संविधान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो निर्वाचन आयुक्तों के नाजुक कंधों पर बहुत जिम्मेदारियां सौंपी हैं. सुप्रीम कोर्ट की राय है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाए. इसमें इससे नियुक्ति प्रक्रिया में तटस्थता आएगी. आपको बता दें कि गुजरात विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सेवानिवृत्त नौकरशाह अरुण गोयल को शनिवार 19 नवंबर 2022 को चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया था.

आपको बता दें कि चुनाव आयोग पर विपक्षी दल पिछले कुछ सालों में तमाम तरह के आरोप लगाते रहे हैं. विधानसभा चुनावों के बाद भी विपक्षी दलों की तरफ से धांधली के कई तरह के आरोप लगे हैं. अब जब जब सुप्रीम कोर्ट की तरफ से इस मामले में संज्ञान लिया गया है तो निश्चित रूप से विपक्षी दलों के अंदर उत्साह की भावना पैदा होगी. क्योंकि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर पिछले कुछ सालों में कई तरह के सवालिया निशान खड़े हुए हैं.

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