sushant sinha

मीडिया का एक बड़ा वर्ग पिछले कुछ सालों से सरकार की हां में हां मिलाता हुआ नजर आता है. मीडिया का एक बड़ा हिस्सा और उससे जुड़े हुए लोग सरकार की प्रचार एजेंसी बनकर रह गए हैं या इसको ऐसे समझा जा सकता है कि मीडिया में एक बड़े हिस्से पर एक विचारधारा विशेष के लोगों का कब्जा है या एक विचारधारा विशेष से जुड़े हुए लोगों की तादाद इस वक्त मीडिया में अधिक है. सुशांत सिन्हा भी उन्हीं में से एक हैं.

सुशांत सिन्हा अक्सर अपने टीवी कार्यक्रमों के माध्यम से और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से सत्ता पक्ष का समर्थन और विपक्ष की खिल्ली उड़ाते हुए नजर आते हैं ऐसा ही कुछ हुआ जब नोट बंदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया. सुशांत सिन्हा ने लिखा कि, विपक्ष की नए साल की बोहनी ही खराब हो गई… नरेन्द्र मोदी सरकार को एक और क्लीन चिट.

जैसे ही सुशांत सिन्हा ने ट्वीट किया लोग उन्हें नसीहत देने लगे. सुशांत ट्वीट करने के बाद खूब ट्रोल हो रहे हैं. शोभित श्रीवास्तव ने उनके ट्वीट पर लिखा कि, सुशांत जी पत्रकार की प्रतिक्रिया हमेशा निष्पक्ष रहनी चाहिए, अगर आप तटस्थ रहेंगे तो पत्रिकारिता की गरिमा बनी रहेगी, किसी एक पार्टी की तारीफ करना कहाँ तक सही है, आपका कार्य समाचार प्रसारित करना है, न कि NDA के पक्ष में झुकाव को दर्ज कराना है. मैं एक सामान्य व्यक्ति के तौर पर कह रहा.

चंद्र कुमार ने सुशांत सिन्हा का जवाब देते हुए लिखा कि, नोट बंदी के बाद नक़ली नोटों पर, लघु उद्योग की कमर टूटने पर, देश के लाइन में खड़े होने, काला धन वापस न आने, आतंकवाद कम न होने आदि पर कोई प्रोग्राम नहीं किया होगा. लेकिन चाटुकारिता का एक मौका नहीं छोड़ते सिन्हा साहब.

राजकुमार स्वामी ने सुशांत सिन्हा का जवाब देते हुए लिखा कि, कुछ भी हो जाए लेकिन गोदी मिडिया का नाम मत झुकने देना. हमें पूरी उम्मीद ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि नये साल में गोदी मिडिया और उसके पतलकार दलाली और तलवे चाटने के नये रिकॉर्ड बनाएंगे.

पोनी पचार नामक टि्वटर यूजर ने लिखा, सुप्रीम कोर्ट का फैसला इतना सही है नोटबन्दी इतना बड़ा मास्टर स्ट्रोक था कि इस का अन्दाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब से नोटबन्दी हुई थी दूसरे साल से लेकर अब तक प्रधानमंत्री ने अपने मुँह से नोटबन्दी का नाम तक नहीं लिया, किसी भी बीजेपी नेता ने सालगिरह पर महामानव को बधाई नहीं दी.

इसी तरह सुशांत सिन्हा के ट्वीट पर अक्की सेहरा नामक ट्विटर यूजर ने लिखा कि, आजकल दलाली के बाजार में पत्रकारिता डूब गई, जिनको देश के हित में आवाज उठाना था वह सरकार के हित में चमचागिरी कर रहे हैं. लगे रहो बीजेपी प्रवक्ता दलाली में बंपर कमाई है, क्योंकि जो लोग गिर चुके हैं अपना ईमान बेच चुके हैं उनसे कोई उम्मीद नहीं की जा सकती.

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